- भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था छात्रों के सपने पूरे नहीं करती.
- यह शिक्षा छात्रों के लिए आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था बन गयी है.
- देश में केवल 1.2 प्रतिशत युवाओं को ही नौकरी मिल पाती है.
Kota : लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा लीक को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. राजस्थान के कोटा में बुधवार को आयोजित छात्रों की गूंज महारैली उन्होंने अपने विचार रखते हुए देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के सब्जेक्ट्स पर केंद्र की मोदी सरकार पर हल्ला बोला.
राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों के दावा किया कि भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था छात्रों के सपने पूरे नहीं करती. यह शिक्षा छात्रों के लिए आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था बन गयी है.
लगभग एक घंटे तक चले संवाद कार्यक्रम को राहुल गांधी ने गैर-राजनीतिक करार दिया. कहा कि संवाद का उद्देश्य सिर्फ छात्रों की समस्याओं, चुनौतियों और आशंकाओं पर चर्चा करना है. राहुल ने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था रोजगार की दिशा में नहीं ले जाती. यह देश के युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने में विफल साबित हुई है.
अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में केवल 1.2 प्रतिशत युवाओं को ही नौकरी मिल पाती है. राहुल गांधी ने आकलन करते हुए कहा कि लगभग 22 लाख छात्र नीट परीक्षा में शामिल होते हैं, इस परीक्षा की तैयारी पर उनके परिवार लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं. यह राशि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के वार्षिक बजट के बराबर है.
इस क्रम में राहुल गांधी ने यह दावा भी किया कि नीट, जेई, यूपीएससी, एसएससी और आरआरबी जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर छात्रों और उनके परिवारों का कुल खर्च लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये है. यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर बैठती है.
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर निजी शिक्षा और कोचिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया है. महंगे निजी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भारी खर्च के बावजूद युवाओं को रोजगार की कोई गारंटी नहीं मिलती.दावा किया कि देश में 100 इंजीनियरों में से 80 बेरोजगार हैं.
श्री गांधी ने नीट अभ्यर्थी आकांक्षा की आत्महत्या की बात उठाई. इसे किसी छात्र की नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता करार दिया. तंज कसा कि भारत का शिक्षा तंत्र सलेक्शन नहीं, बल्कि रिजेक्शन की प्रणाली पर आधारित हो गया है.
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