New Delhi : राहुल गांधी के भारत आर्थिक सुनामी की ओर बढ़ रहा है...वाले दावे पर भाजपा ने पलटवार किया है. भाजपा ने कहा कि राहुल देश में भय फैलाने का प्रयास कर रहे हैं.
दरअसल कांग्रेस आदिवासी शाखा के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने दावा किया था कि भारत एक भयंकर और अकल्पनीय आर्थिक सुनामी की ओर बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के खिलाफ सुरक्षा कवच (शॉक एब्जॉर्बर) के रूप में काम करने वाले तंत्र को हटा दिया है. इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एक साल के भीतर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे.
भाजपा ने राहुल के इसी बयान को लेकर उन पर हमला बोला. जवाब दिया कि यदि सही में भारत ने आर्थिक सुरक्षा उपाय नहीं किये होते, तो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया संघर्ष, तेल आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था लचीलापन क्यों दिखा रही है?
Rahul Gandhi’s claim that India is heading towards an “economic tsunami” because the Government has removed all shock absorbers is not just wrong, it is classic fear-mongering.
— Amit Malviya (@amitmalviya) June 4, 2026
If India’s shock absorbers had truly been removed, why is the economy continuing to show resilience… pic.twitter.com/7QZvdL8OPi
भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारत बाहरी झटकों का सामना कर रहा है, लेकिन भारत असहाय नहीं है. भारत ने आर्थिक सुरक्षा उपाय हटाये नहीं हैं, बल्कि पिछले एक दशक में इनका निर्माण किया गया है.
अमित मालवीय ने इसके कई उदाहरण दिये. कहा कि देश में अप्रैल के अंत में चावल और गेहूं का बफर स्टॉक 817.53 लाख टन था, इससे खाद्य सुरक्षा को मजबूत आधार मिला है.
वित्त वर्ष 2026 में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 94.5 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त बना हुआ है.
उन्होंने कहा कि सरकार(मोदी) ने नागरिकों, व्यवसायों और नौकरियों की सुरक्षा के लिए अहम कदम उठाये हैं. वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती ने उपभोक्ताओं को राहत दी.
मोदी सरकार ने सतही कोयले और लिग्नाइट के गैसीकरण के लिए 37,500 करोड़ रुपये स्वीकृत किये हैं, जिसका लक्ष्य 75 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता प्राप्त करना है. इससे 2.5-3 लाख करोड़ रुपये के निवेश को जुटाने की उम्मीद है.
अमित मालवीय ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर हमलावर होते हुए कहा, 2011 और 2013 के बीच, रुपये में 36% की गिरावट आयी. विदेशी मुद्रा भंडार जुलाई 2011 में लगभग 294 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर अगस्त 2013 में लगभग 256 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया था.
विदेशी मुद्रा भंडार और बाह्य ऋण का अनुपात वित्त वर्ष 2011 में 95.8फीसदी से गिरकर वित्त वर्ष 2014 में 68.8फीसदी हो गया था, कहा किआरबीआई को डॉलर जमा आकर्षित करने के लिए एफसीएनआर (बी) विंडो खोलनी पड़ी और आकर्षक प्रोत्साहन देने पड़े.
भारत ने अंततः इस योजना के माध्यम से 26.6 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए, जो 1991 में आईएमएफ द्वारा दिये गये बेलआउट पैकेज से लगभग बारह गुना अधिक था. भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तो संकट आने से पहले ही भारत को कमजोर कर दिया था.
लेकिन मोदी सरकार ने बार-बार आने वाले संकटों, कोविड संकट, रूस-यूक्रेन संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि, पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत को मजबूत किया है.कहा क राहुल गांधी को अब घबराहट फैलाना बंद कर देना चाहिए.
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