Lagatar Desk: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश की सबसे बड़ी कंपनी टाटा (Tata) को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है. और किसी भी कारोबारी नेता में एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया है कि आप कब तक चुप रहेंगे? क्या तब तक, जब तक कि वे आपको पूरी तरह कब्जे में न ले लें?
Tata is being criminally destroyed, and no business leader dares say a word. How long will you stay silent? Until they own you? Indian business is not Modi and Shah's plaything. You lack courage. We don't. We will ensure justice for these crimes.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 28, 2026
राहुल गांधी का यह पोस्ट टाटा ट्रस्ट के मालिक नोवेल टाटा द्वारा कंपनी सेक्रेटरी को पत्र लिखने के एक दिन बाद आया है. नोवेल टाटा ने 26 अक्टूबर को लिखे पत्र में एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर पुनः नियुक्ति को अवैध ठहराया है. साथ ही 17 सितंबर को बोर्ड के सदस्यों की बैठक का ऑडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग, मिनट्स व वोटिंग डिटेल्स मांगा है.
इसके अलावा एक और मामला है कि भारत सरकार और आरबीआई टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराना चाहती है. आरबीआई ने इसके लिए आदेश जारी किये हैं, जबकि देश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा यह कारोबारी घराना चाहता है कि टाटा की कंपनियां टाटा ट्रस्ट के अधीन ही चलता रहे.
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा है कि भारतीय कारोबार मोदी और शाह के खिलौने नहीं हैं. आपमें हिम्मत की कमी है. हममें नहीं है. हम इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे. माना जा रहा है कि राहुल गांधी ने यह पोस्ट टाटा ट्रस्ट, टाटा संस और इसकी कंपनियों को लेकर सरकारी संस्थाओं के ताजा आदेशों-निर्देशों की वजह से जारी किया है.
उल्लेखनीय है कि 28 सितंबर को टाटा ट्रस्ट ने रीस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव दिया था. जिसके तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सोल्युशन और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में मर्ज करने का प्रस्ताव दिया था. इससे कंपनी की मार्केटिंग वैल्यू बढ़ जाएगी और कंपनी एनबीएफसी की कैटेगरी से बाहर हो जाएगी. लेकिन आरबीआई ने इसे मंजूरी नहीं दी. बोर्ड के भीतर भी कुछ असहमतियां रहीं.
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इसके अलावा दूसरी बड़ी हिस्सेदारी 18.4 प्रतिशत एसपी ग्रुप की है. एसपी ग्रुप लंबे समय से इस कोशिश में है कि टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट हो, ताकि वह अपने शेयर बेच कर करीब 25 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को खत्म कर सके.
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कुछ दिन पहले स्पष्ट कहा था कि टाटा संस बड़ी एनबीएफसी कंपनी है, उसे लिस्ट होना चाहिए. कुछ दिन पहले नोवेल टाटा ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर पीएम मोदी से मिलने का भी समय मांगा था, लेकिन उन्हें अब तक कोई समय नहीं मिला.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.