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सदन में राज सिन्हा ने उठाया सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में अनियमितता का मामला

Ranchi: विधानसभा में सरयू राय के सवाल को विधायक राज सिन्हा ने सदन में उठाते हुए सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं और प्राक्कलन से अधिक व्यय के मामले में सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर वित्तीय कमी और केंद्र के सहयोग नहीं मिलने की बात करती है,
 

Ranchi: विधानसभा में सरयू राय के सवाल को विधायक राज सिन्हा ने सदन में उठाते हुए सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं और प्राक्कलन से अधिक व्यय के मामले में सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर वित्तीय कमी और केंद्र के सहयोग नहीं मिलने की बात करती है, लेकिन 4.88 करोड़ रुपये के प्राक्कलन वाले कार्य के लिए न्यायालय से 130 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश होना गंभीर विषय है.



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क्या है पूरा मामला?

 

मामला वर्ष 2012 में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) द्वारा सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना की मरम्मत से जुड़ा है.

परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर ने दोनों इकाइयों की मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था.

इसके विपरीत 2 मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्य अभियंता (उत्पादन) ने 20.87 करोड़ रुपये व्यय की कार्यदिश जारी कर दी.

बाद में भुगतान विवाद को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा और माननीय कमर्शियल कोर्ट, रांची ने 9 अक्टूबर 2023 को झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (JUUNL) के विरुद्ध आदेश पारित करते हुए भेल को ब्याज सहित लगभग 130 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया.

इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील (01/2025) और सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी (9580/2025) दायर की गई, जो खारिज हो चुकी है. इसके बाद JUUNL ने सुप्रीमकोर्ट में रिव्यू पिटीशन (डायरी संख्या 35899/2025, दिनांक 6 जुलाई 2025) दाखिल किया है.

वहीं भेल ने आदेश के अनुपालन के लिए कमर्शियल कोर्ट में Execution Case No. 05/2024 दायर कर संपत्ति कुर्की का अनुरोध किया है. मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को निर्धारित है.

 

CBI जांच और विभागीय कार्रवाई

 

प्रभारी मंत्री योगेंद्र महतो ने बताया कि इस मामले में Regular CBI Case No. CB1/07/2016 दर्ज है और मामला सीबीआई कोर्ट, रांची में विचाराधीन है. उन्होंने कहा कि जांच में भेल के तीन और JUVNL के चार अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है.

वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड (JSEB) के 4 पदाधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चलाई गई. मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि पूरे मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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