राज्यसभा चुनाव-2026 संपन्न हो गया है. झारखंड में भाजपा समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी जीत गए. झामुमो के प्रत्याशी बैजनाथ राम भी सांसद बन गए. इंडिया गंठबंधन के पास जीत के लिए पर्याप्त वोट (56) रहते हुए भी कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा हार गए. काहे कि भीतरघात हुआ.
रिजल्ट के बाद कांग्रेस कह रही है राजद व माले ने धोखा दिया. राजद और माले के पोलिंग एजेंट दावा कर रहे हैं कि उनके दल के प्रत्याशियों ने वोट प्रणव झा को ही दिया है. उनको दिखा कर दिया है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन हैं, जिन्होंने अंतरात्मा की आवाज सुनी और नाथवानी को वोट दिया.
सभी उस शक्तिमान के बारे में पता लगा रहे हैं, जिसने खेला कर दिया. इंडिया गंठबंधन के तीन दलों कांग्रेस, राजद व माले के बीच तू झूठा, हम सच्चा का खेल चल रहा है. असल में जानते सब हैं कि असल में "गंगाधर" ही "शक्तिमान" है, पर "गंगाधर" का नाम सार्वजनिक हो नहीं रहा है. यहां "गंगाधर" एक नहीं हैं, छह-छह हैं. उनके पीछे किनका हाथ है.
सवाल यह है कि चुनाव से एक दिन पहले तक ऐसा क्या था कि झामुमो 56 को 61 बता रहा था और कांग्रेसी जीत को लेकर निश्चिंत नजर आ रहे थे. सोशल मीडिया पर जोरदार हमले हो रहे थे. क्या तब उन्हें नहीं पता था कि छह "गंगाधर" जो उनके साथ बैठे हैं, वह "शक्तिमान" बन चुके हैं. उनकी अंतरात्मा का सौदा हो चुका है. संभव है बहुतों को यह भी पता होगा.
दरअसल, इस बार के राज्यसभा चुनाव को लोग झारखंड की सरकार की सेहत से भी जोड़ करके भी देख रहे थे. झामुमो दोनों सीट चाहता था, लेकिन कांग्रेस ने अपनी प्रत्याशी उतार दिया. झामुमो ने ना-नुकुर करके हथियार डाल दिये. लेकिन क्या सच में इसे भी स्वीकार कर लिया. सवाल यह कि परदे के पीछे से खेल करने वाला "गंगाधर" है कौन? जब तक "गंगाधर" का पता नहीं चलता "शक्तिमान" का नाम सामने नहीं आयेगा.
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