Ranchi : राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद भी सन्नाटा था. महफिल में रौनक नहीं थी. चारों तरफ मुर्दनी छायी थी. आप आये तो बहार आ गयी. महफिल में रौनक छा गयी. हरकत के साथ हर दिल की धड़कन तेज हो गयी. लोग सोचने लगे पता नहीं अब क्या होगा? वजह निर्दलीय होने के बावजूद आपके सर्वदलीय होना है.
आपके आने से महफिल में छायी रौनक के बीच शोर मचा. शोर का मुद्दा हार्स ट्रेडिंग से जुड़ा था. इस शोर से वोटरों को अपने शहर से कहीं दूर जा कर सैर सपाटे का मौका मिलता है. लेकिन इस बार यह मौका हाथ से निकल गया. पता नहीं क्यों. सुना है सैर सपाटा का मौका खोने से कुछ वोटर नाराज है. पता नहीं अपनी नारजगी का कसर कब और कैसे निकालेंगे. जब वोटर नाराज हो कर कसर निकालता है तो कुर्सी डगमगाती है. ऐसा तब होता है जब वोटर आम होता है. अभी तो वोटर खास हैं. खास वोटरों की नाराजगी से कुर्सी झटकी जाती है.
महफिल में आपके निर्दलीय होने का शोर है. लेकिन गुजरे कुछ साल आपके सर्वदलीय का सबूत पेश करते है. हर दल आपको साथ होता है. अब तक हर चुनाव में बाजी मारना आपके सर्वदलीय होने के सबूत है. इस बार भी निर्दलीय होते हुए एक दल आपके साथ खड़ा है. बाकी का पता नहीं. न जाने कब कौन किसके साथ खड़ा हो जाये. वजह इसमें Party Whip का चाबुक नहीं चलता है. किसी को किसी के भी साथ हो लेने की पूरी आजादी है. इसी लिए दो अनार के लिए तीसरा बीमार भी हाथ मार सकता है.
हॉर्स ट्रेडिंग को शोर कोई पहली बार तो मचा नहीं है. इससे पहले भी शोर मचता रहा है. शोर सुनकर सीबीआई तो दो बार मैदान में कूदी थी. वोटरों के घरों की तलाशी ली. लेकिन हुआ क्या? 12-14 साल गुजर गये. किसी का कुछ नहीं बिगड़ा. एक बार तो Income Tax ने भी पैसा पकड़ कर अपना कद बढ़ा लिया था. वाह वाही लूटी. पुरस्कार लिये. लेकिन सब कुछ फुस्स हो गया. क्योंकि उसने जिसका पैसा बताया था उसके साबित ही नहीं कर सकी.
हॉर्स ट्रेडिंग में CBI और Income Tax की हवा निकलने के बाद हालात बदल गये हैं. तौर तरीके भी बदल गये हैं. लेकिन यह साफ नहीं कि अब हॉर्स खरीददार के पास खुद ही चला आता है या खरीददार को हॉर्स तक जाना पड़ता है. चंद दिनों की बात है. पता चल जायेगा कि हॉर्स ट्रेडिंग हुआ या नहीं. हार्स खरीददार के पास खुद ही गया या खरीददार हॉर्स के पास गया. तब तक इंतेजार ही सही...

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