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राम पुकार राम की डायरी में दर्ज है ग्रामीण विकास के अफसरों की कमीशनखोरी का ब्योरा

Ranchi : ग्रामीण विकास विभाग के असिसटेंट इंजीनियर राम पुकार राम की डायरी में ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों की कमीशनखोरी का ब्योरा दर्ज है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को यह डायरी इस इंजीनियर के घर पर की गयी छापेमारी के दौरान मिली थी. जांच के दौरान कुछ इंजीनियरों ने सचिवों के कमीशनखोरी की बात स्वीकार की है. इनमें से कुछ आखिरी समय तक अपने बयान पर डटे रहे जबकि कुछ मुकर गये. एक इंजीनियर ने अपने बयान से पलटने के लिए डिप्रेशन में होने का हवाला दिया. इसकी वजह कम उम्र में किडनी डोनेट करना बताया है.

 

ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर में कमीशनखोरी के मुद्दे पर आरोपित इंजीनियरों द्वारा दिये गये बयान की वजह से ट्रायल के दौरान तत्कालीन सचिवों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इसकी वजह ईडी की छापामारी में जब्त दस्तावेज में लिखित कमीशनखोरी का हिसाब-किताब है. ईडी ने इंजीनियरों द्वारा पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज कराये गये बयान और दस्तावेज में लिखित तथ्यों के आधार पर कमीशनखोरी के अपने दावे की पुष्टि की है. हालांकि ईडी ने अब तक इस मामले में किसी सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है. लेकिन न्यायालय को इन तथ्यों की जानकारी दी है.

 

उल्लेखनीय है कि ईडी ने असिसटेंट इंजीनियर राम पुकार राम के ठिकानों से एक डायरी जब्त की थी. इस पर “हिसाब-किताब” लिखा हुआ था. इसमें 69 योजनाओं के टेंडर से संबंधित विस्तृत ब्योरा दर्ज है. इन ब्योरों में बिडर का नाम, काम पाने वाले ठेकेदार का नाम और वसूले गये कमीशन में हिस्सेदारी शामिल है. राम पुकार राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम का सर्वाधिक करीबी माना जाता है. वीरेंद्र राम के निर्देश पर राम पुकार राम ने खुद ही हिसाब-किताब की इस डायरी में इन ब्योरों को दर्ज किया है. इसमें ठेकेदार और उसे मिले टेंडर के हिसाब के वसूली गयी राशि का विस्तृत ब्योरा दर्ज है.

 

राम पुकार राम सहित अन्य इंजीनियरों द्वारा दिये गये बयान और जब्त दस्तावेज के आधार पर यह नतीजा निकाला है कि ठकेदारों से वसूली गयी कमीशन की राशि में 1.35 प्रतिशत मंत्री, 0.65 प्रतिशत विभागीय सचिव, 0.50 प्रतिशत मुख्य अभियंता के बीच बांटा जाता था. इसके अलावा कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और तकनीकी सचिव की हिस्सेदारी कुल वसूली में 0.40 प्रतिशत है.

 

ईडी की रिपोर्ट में ग्रामीण विकास में कमीशन वसूली ओर उसे एक दूसरे तक पहुंचाने के निर्धारित सिस्टम का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार ठेकेदार कमीशन की राशि सहायक अभियंता को देता था. सहायक अभियंता इसे कार्यपालक अभियंता को देते थे. कार्यपालक अभियंता के माध्यम से यह रकम मुख्य अभियंता तक पहुंचती थी. मुख्य अभियंता इसे मंत्री के आप्त सचिव को देते थे. इसके बाद वहां से मंत्री और सचिव की हिस्सेदारी का बंटवारा होता है. कभी कभी संजीव लाल तक पैसा पहुंचाने के लिए मुन्ना सिंह और उसके भाई संतोष कुमार उर्फ रिंकू का इस्तेमाल किया जाता था. संजीव लाल के निर्देश पर मुन्ना सिंह और उसके भाई के माध्यम से जहांगीर तक पैसा पहुंचाया जाता था.

 

कमीशन की रकम एक जगह पहुंचाने और उसमें हिस्सेदारी की बात कार्यपालक अभियंता अजय कुमार ने भी स्वीकार की थी. उन्होंने पहली बार ईडी को दिये गये बयान में 27 लाख कमीशन वसूलने और उसमें से 20 लाख रुपये संजीव लाल को देने की बात स्वीकार की थी. दूसरी बार दिये गये बयान में उन्होंने अपने पहले बयान में तथ्यों को छिपाने की बात कही. दूसरी बार दिये गये बयान में 4.77 करोड़ रुपये कमीशन वसूलने की बात मानी. लेकिन तीसरी बार यह कहते हुए अपने पहले के सभी बयान से मुकर गये कि किडनी डोनेट करने की वजह से वह डिप्रेशन में थे. उन्होंने अपना सभी बयान डिप्रेशन की हालत में दर्ज कराये थे.

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