राज्य में पिछड़ों का प्रतिनिधित्व बहुत कम
मौके पर उपस्थित महेश्वर साहू ने बताया कि राज्य में पिछड़ों की बड़ी आबादी है, जबकि उनकी सामाजिक, शैक्षणिक तथा आर्थिक स्थिति अच्छी नही है. इस वर्ग का सरकारी एवं अर्धसरकारी सेवा एवं पदों में प्रतिनिधित्व भी बहुत कम है. झारखंड में पिछड़ों को राष्ट्रीय मानक के आधार पर आरक्षण मिलना संवैधानिक अधिकार से जुड़ा मामला है. साथ ही उन्होंने कहा कि अखिल झारखंड पिछड़ा वर्ग महासभा जातीय जनगणना कराने हेतु यथोचित पहल करने की मांग करती है. उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए जीवन पर्यंत वैधता वाला जाति प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाता है, लेकिन पिछड़ों को बार -बार जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने पिछड़ों के लिए भी आजीवन वैधता वाला जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की बात कही. मौके पर हेमलाल महतो, दिलीप दांगी, मदन महतो, लालचंद महतो, महेश करमाली, विभावि प्रभारी राजेश महतो, नप सचिव राजेंद्र महतो, कार्यकारी अध्यक्ष हरेश राय, वार्ड पार्षद देवधारी महतो, चितु महतो सहित अन्य लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें – मॉब">https://lagatar.in/to-stop-mob-lynching-jharkhand-mob-violence-and-prevention-of-mob-lynching-bill-2021-passed-from-the-house/">मॉबलिंचिंग रोकने के लिए ‘झारखंड भीड़-हिंसा एवं भीड़-लिंचिंग निवारण विधेयक 2021’ सदन से पास [wpse_comments_template]
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