Ramgarh : वेस्ट बोकारो के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा से संचालित फूड स्टॉल आज अवसर, सम्मान और उम्मीद का नया माध्यम बन रहे हैं. इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है ‘स्वादकार्ट’, जो टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा समर्थित एक पहल है. यह पहल महिलाओं के लिए जमीनी स्तर पर उद्यमिता को नई दिशा और पहचान दे रही है.
कई वर्षों तक ग्रामीण महिला उद्यमी छोटे और असंगठित आर्थिक कार्यों पर निर्भर रहीं, जिनसे उन्हें प्रतिमाह केवल 1,000 से 15,000 रूपये तक की आय होती थी. सीमित आधारभूत सुविधाएं, मौसम की अनिश्चितता और पहचान की कमीं के कारण उनके व्यवसाय आगे नहीं बढ़ पा रहे थे.
‘स्वादकार्ट’ ने इस स्थिति को बदलते हुए सोलर ऊर्जा से संचालित, सुव्यवस्थित फूड स्टॉल उपलब्ध कराए हैं, जो किफायती, पर्यावरण अनुकूल और रेसिलिएंट हैं. इन इकाइयों की मदद से महिलाएं अब नियमित रूप से अपना व्यवसाय चला पा रही हैं, अधिक ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं और अपनी कार्यक्षमता को बेहतर बना रही हैं. आज कई लाभार्थी प्रतिमाह रूपए 30,000 से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं, जो आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
आदित्य कुमार सिंह, यूनिट लीड – वेस्ट बोकारो, टाटा स्टील फाउंडेशन ने कहा, स्वादकार्ट ग्रामीण महिला उद्यमियों के जीवन में बदलाव ला रहा है. सोलर ऊर्जा से संचालित फूड स्टॉल के माध्यम से महिलाओं को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका के अवसर मिल रहे हैं. इस पहल ने महिलाओं को छोटे और असंगठित कार्यों से आगे बढ़ाकर बेहतर आधारभूत सुविधाओं और व्यापक ग्राहक पहुंच वाले सुव्यवस्थित व्यवसाय से जोड़ा है.
पहले अधिकांश महिलाएं प्रतिमाह 1,000 से 15,000 तक कमा लेती थीं, लेकिन आज कई लाभार्थी 30,000 से अधिक मासिक आय प्राप्त कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है. आय बढ़ाने के साथ-साथ ‘स्वादकार्ट’ जमीनी स्तर पर महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को भी बढ़ावा दे रहा है. वर्तमान में विभिन्न स्थानों पर स्वादकार्ट की सात इकाइयां सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, जो ग्रामीण समुदायों में मजबूत सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पैदा कर रही हैं.
वेस्ट बोकारो में बबिता देवी की कहानी संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर सामने आई है. वर्ष 2017 में पति के निधन के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालना उनके लिए बड़ी चुनौती थी. ‘स्वादकार्ट’ के सहयोग से उन्होंने होली क्रॉस स्कूल के पास फलों का सलाद और जूस का स्टॉल शुरू किया.
उनका यह व्यवसाय आय का एक भरोसेमंद स्रोत बन चुका है, जिससे वे अपने परिवार का पालन-पोषण करने के साथ-साथ अपने बच्चों की शिक्षा में भी निवेश कर पा रही हैं. अपने जीवन के सफर को याद करते हुए बबिता देवी कहती हैं, “पति के निधन के बाद अकेले परिवार संभालना मेरे लिए बहुत कठिन था.
‘स्वादकार्ट’ ने मुझे अपना फलों का सलाद और जूस स्टॉल शुरू करने का अवसर दिया, जो आज आय का एक भरोसेमंद माध्यम बन गया है. अब मैं अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पा रही हूं और आत्मसम्मान व आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हूं.
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