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रामगढ़: लाखों की लागत से बना जलमीनार बेकार, पानी की आस में ग्रामीण

Ramgarh: गांव में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 2013-14 में एक योजना लायी गयी. इस योजना के तहत जिला समाहरणालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर बसे कोठार गांव में जलमीनार बनाई गई. जब जलमीनार बनी तो ग्रामीणों को काफी खुशी हुई. गांव में इसकी चर्चा भी हुई. लेकिन बनने के बाद जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी. कोठार गांव के ग्रामीण बताते हैं कि चंद्र प्रकाश चौधरी के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री रहते यह जलमीनार बनाया गया था. बनने पर पानी मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ. यह चालू ही नहीं हुआ. बताया कि जलमीनार बनने के बाद जब इसमें पानी चढ़ाया गया तो कुछ दिक्कत हुई तो चालू नहीं हुआ. उसके बाद से यह बेकार पड़ा है. जलमीनार स्थल पर किसी तरह का कोई सूचना बोर्ड नहीं लगा है. जिससे यह पता चल सके कि यह जलमीनार कितनी लागत से और कब बना है. जबकि ऐसा होना चाहिए. जब लगातार मीडिया की टीम की जानकारी हुई तो वास्तविक स्थिति जानने स्पॉट पर पहुंची. वहां से डीएमएफटी कार्यालय पहुंची. कर्मचारियों ने कहा कि जानकारी देने का आदेश नहीं है. इसके बाद टीम डीडीसी कार्यालय पहुंची. वहां पर सभी दूसरे अधिकारी से जानकारी लेने की बात कहते रहे. आखिर में जेई बेदिया संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास जानकारी नहीं है. तब वापस टीम कोठार गांव पहुंची. पूर्व मुखिया सह 20 सूत्री उपाध्यक्ष दिनेश मुंडा ने बताया कि पूर्व पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी जब मंत्रिमंडल में थे तो कई साल पहले यह जलमीनार बनी थी. बनने के बाद जलापूर्ति के लिए जलमीनार में पानी भरा गया तो जलमीनार की दीवार झड़ने लगी. फिर आगे कुछ नहीं किया गया. उसके बाद से देखने के लिए कोई नहीं पहुंचा. कई बार इस समस्या को लेकर जिले के डीडीसी, डीएमएफटी, एक्सीक्यूटिव और पीएचईडी एक्सीक्यूटिव सहित कई पदाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया है. यहां तक कि 20 सूत्री की बैठक में भी गांव की पेयजल समस्या को लेकर बात रखी गयी है. लेकिन अभी तक किसी भी पदाधिकारी ने इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया.

जलमीनार से कोठार गांव के लोगों को पेयजल मिलता है

दिनेश मुंडा ने कहा कि यह जलमीनार पचास लाख से भी अधिक की लागत से बना है. अगर यह जलमीनार चालू होता तो कोठार और हुहुआ गांव के करीब दस हजार से भी अधिक आबादी लाभान्वित होती. उन्हें जलापूर्ति योजना का लाभ मिलता. गांव के लोग आज भी पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं. मौजूदा समय में कोठार गांव के ग्रामीणों को दामोदर नदी से पानी की जलापूर्ति हो रही है. इसके रखरखाव और देखभाल करने वाले महीने में 50 रुपए लेते हैं. इसे भी पढ़ें- रेलवे">https://lagatar.in/elderly-people-are-no-longer-exempted-on-railway-tickets-rahul-gandhi-furious-at-modi-government-said-for-his-friends-he-breaks-even-the-stars/">रेलवे

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