लोगों को खूब भा रहा ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद
मेलें में सखी मंडल की महिलाओं द्वारा नायब हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की विशेष स्टॉल लगाई गई है. जिनमें उनके द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद जैसे लाह और कांच की चूड़ियां, बैग्स, पापड़, विभिन्न प्रकार के अचार, डोकरा आर्ट, दाल, महुआ, आटा, बेकरी आइटम, जूते, खिलौने, लौह औजार आदि अन्य कलात्मक वस्तुएं आकर्षण का केंद्र रहे. इन उत्पादों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने हुनर और मेहनत से नई पहचान बना रहीं है.स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी लोग उठा रहे आनंद
मेले में दीदी कैफे में झारखंड के पारंपरिक व्यंजन जैसे धुस्का, बर्रा, जलेबी, गुल्गुल्ला, पीठा, पकोड़ा, मडुआ छिलका आदि के साथ ही दूसरे राज्यों से आये लोगों ने भी में पारंपरिक व्यंजन के साथ साथ वेस्टर्न कुजिन्स के ढेरो स्टॉल लगाया है. जिसमें खूब भीड़ उमड़ रही है.हरिशंकर प्रसाद ने भोजपुरी गीत से लोगों को झुमाया
सोमवार को कला एवं संस्कृति विभाग के द्वारा महोत्सव में जहानाबाद के हरिशंकर प्रसाद सिंह ने भोजपुरी गीत की प्रस्तुती से लोगों को खूब झुमाया. बच्चों के लिए आयोजित चॉकलेट रेस प्रतियोगिता दो आयु वर्ग में आयोजित की गई. पांच से नौ आयु वर्ग में प्रथम स्थान अर्जित आनंद, द्वितीय स्थान एडम एल्विन एवं तृतीय स्थान देव कुमार ने प्राप्त किया. ग्रुप बी में दस से चौदह आयु वर्ग में वीर कुमार प्रथम स्थान, द्वितीय वेदांत सिंह एवं तृतीय जीत कुमार हुए.स्टॉल पर अनधिकृत कब्जा करने वालों पर कार्रवाई
राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव में प्रशासनिक व्यवस्था बनाये रखने के लिए खादी बोर्ड एवं जेएसएलपीएस के संयुक्त टीम ने दंडाधिकारियों के साथ मेले का निरीक्षण किया. इस दौरान पाया कि कुछ लोगों ने अपने नाम से स्टॉल पंजीकृत कराकर अधिक मूल्य पर अन्य को बेच दिया तथा बेचे गये स्टॉल पर अनधिकृत अपवर्जित वस्तुओं बिक्री की जा रही है. कुछ लोगों द्वारा स्टॉल पर अनधिकृत कब्जा भी कर लिया गया है. निरीक्षण में जिन स्टॉलों में आवंटन निर्धारित शर्तों की कमी पायी गयी, उनलोगों पर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया. इसे भी पढ़ें – मोहन">https://lagatar.in/jagadguru-rambhadracharya-and-swami-avimukteshwaranand-saraswati-do-not-agree-with-mohan-bhagwats-statement/">मोहनभागवत के बयान से सहमत नहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
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