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रांची : दिवाली पर हैदराबाद से आकर सजावट सामग्री बेच रहे 30 आदिवासी परिवार

बाजार में गेट व पत्तों पर बने 12 देवताओं की डिमांड अधिक
Ranchi : धनतेरस व दिवाली नजदीक है. शहर से लेकर गांव में दिवाली की तैयारी शुरू हो गई है. राजधानी रांची में दिवाली पर घरों की सजवाट की सामग्री का बाजार सज गया है. आर्टिफिशियल गेट व कागज के पत्तों पर 12 देवी-देवताओं की तस्वीरों की डिमांड अधिक है. हैदराबाद से ट्रेन से सफर कर 30 आदिवासी परिवार सजावट की सामग्री लेकर रांची पहुंचे हैं. ये सभी घर की सजावट के समान बेच रहे हैं. इसमें तोरण द्वार,वंदरवार, हैगिंग गुलाब फूल के गुलदस्ता आदि शामिल हैं. इसके साथ ही कागज से बने पत्तों पर 12 देवी-देवताओं की तस्वीरों की डिमांड अधिक है. इनमें साईं बाबा, लक्ष्मी, गणेश, माता सरस्वती, पांडुरंगा, तिरुपति, मुरगण, मां दुर्गा, शिव-पार्वती की तस्वीरें शामिंल हैं. सजावटी सामान बेचने वाले प्रभु देवा ने बताया कि वह 15 साल से रांची के बड़ा तालाब के सामने दुकान लगा कर दिवाली पर सजावट की सामग्री बेचते आ रहे हैं. ये लोग हैदारबाद ट्रेन से 22 अक्टूबर को रांची पहुंचे हैं. ये यहां एक नवंबर तक रुककर कारोबार करेंगे. प्रभु देवा ने बताया कि वे लोग सजावट सामग्री चेन्नई से खरीदकर हैदराबाद लाते हैं. वहां पूरा परिवार मिलकर डेढ़ महीने में सजावट के सामान हाथ से तैयार करते हैं. इसके बाद रांची पहुंचते हैं. यह है सामान की कीमत   तोरण द्वार (10 फीट)- 1200 रुपये 3 फीट का गेट- 200 रुपये ऊन का गेट- 180 रुपये पत्तों पर बने देवी-देवता- 80 रुपये

चार भाषाओं के जानकार हैं आदिवासी परिवार

हैदराबाद से रांची आए आदिवासी परिवार मेवड़ा, काड़ीवाड़ा व पवर जनजाति के हैं. ये चार भाषाएं हिंदी, तेलगु, तमिल व कन्नड़ भाषा बोलते हैं. ये यहां सस्ते होटलों में खाना खाते हैं और जमीन पर सोकर रात गुजारते हैं. बारिश में दुकानों के शटर के नीचे रात गुजारते हैं. यह भी पढ़ें : जब">https://lagatar.in/as-long-as-i-am-alive-i-will-not-let-any-harm-come-to-reservation-and-constitution-chirag-paswan/">जब

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