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रांची : कुड़मी की ST मांग के विरोध में 5 अक्टूबर को मोरहाबादी में महारैली

कुड़मी को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग के विरोध में पुरूलिया रोड स्थित एसपीडी सभागार हॉल में संवाददाता सम्मेलन आयोजित की गई. यह आदिवासीअस्तित्व बचाओ मोर्चा के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई.
 

Ranchi : कुड़मी को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग के विरोध में पुरूलिया रोड स्थित एसपीडी सभागार हॉल में संवाददाता सम्मेलन आयोजित की गई. यह आदिवासीअस्तित्व बचाओ मोर्चा के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. 

 

इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग, अजय तिर्की, सुषमा बिरूली, रूपचंद तिर्की, अशोक लोहरा, प्रेमचंद मुर्मू और वाल्टर कंडुलना समेत कई बुद्धिजीवियों ने कहा कि कुड़मी आदिवासी नहीं हैं और इनकी एसटी दर्जा की मांग एक साजिश है.

 

ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि आजसू और जेएलकेएम पार्टी समाज को गुमराह कर 2029 में सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही हैं. कुड़मी फर्जी दस्तावेजों के सहारे खुद को आदिवासी साबित करने में जुटे हुए हैं.

 

अजय तिर्की ने कहा कि कुड़मी महतो लव-कुश का वंशज हैं, जबकि उनका इतिहास आदिवासी संस्कृति से मेल नहीं खाता है. अंग्रेजी शासनकाल में 1931 में उन्होंने खुद को एसटी से अलग दर्ज करवाया था. उन्होंने कहा कि यदि इन्हें एसटी दर्जा मिला तो आदिवासी समाज का संवैधानिक अधिकार और सम्मान छिन जाएगा.

 

नेताओं ने आरोप लगाया कि कुड़मी समाज राजनीति के लिए झूठे आंकड़े और फर्जी इतिहास गढ़ रहा है. कुड़मी शत्रु आक्रमण से बचने के लिए छोटानागपुर में बसे थे. चुआड़ विद्रोह को कुड़मी समाज अपने नाम करने का प्रयास कर रहा है. ये लोग कोईरी, तेली और कुशवाहा जैसी जातियों को मिलाकर जनसंख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं, जबकि वास्तविक संख्या 24 प्रतिशत से भी कम है.

 

5 अक्टूबर को मोरहाबादी में महारैली

अजय तिर्की ने घोषणा की कि कुड़मी की एसटी मांग के विरोध में 5 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान में विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा. इसमें हजारों आदिवासी शामिल होंगे.

 

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