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रांची : राज हस्पताल में स्टेम सेल थेरेपी से ऑटिज्म का सफलता पूर्वक इलाज संभव

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Ranchi : स्टेम सेल थेरेपी एक नयी चिकित्सा प्रणाली का हिस्सा है और इसे उच्च तकनीकी उपचार माना जाता है. जो अभी मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में उपलब्ध है. लेकिन ऑटोलॉगस बोन मैरो सेल ट्रांसप्लांट के रूप में स्टेम सेल थेरेपी की सुविधा शुरू करके राज अस्पताल, रांची स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता में एक और मील के पत्थर तक पहुंच गया है. शहर के इस प्रमुख संस्थान में ऑटोलॉगस बोन मैरो सेल ट्रांसप्लांट, डॉ. बीएस राजपूत के द्वारा किया गया है, जो मुंबई के एक प्रसिद्ध स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सर्जन और रीजनरेटिव मेडिसिन के विजिटिंग प्रोफेसर हैं. मणिपुर का 7 वर्षीय लड़का है जो एएसडी (ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर) के साथ एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) से पीड़ित है. 6 महीने पहले मरीज के पिता डॉक्टर बी एस राजपूत के पास मरीज के इलाज के लिए आए थे, जब बच्चे को ऑटोलॉगस स्टेम सेल प्रत्यारोपण (अर्थात मरीज का अपना स्टेम सेल, जिसे शल्य चिकित्सा द्वारा उसके अस्थि मज्जा से निकाला गया था ) का पहला सत्र दिया गया था. जिसके बहुत ही अच्छे परिणाम आये.  तब से मरीज का ऑटिज्म और एडीएचडी काफी नियंत्रित है. 27 जुलाई 2022 को बच्चे को ऑटोलॉगस स्टेम सेल प्रत्यारोपण का दूसरा सत्र दिया गया. ऐसे उपचार में स्टेम सेल प्रत्यारोपण के तीन से चार सत्रों की आवश्यकता होती है. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/world-hepatitis-day-organizing-program-in-rims-health-minister-said-disease-will-run-away-from-cleanliness/">जमशेदपुर

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प्रत्यारोपण के बाद मानसिक स्थिति में सुधार

उल्लेखनीय है कि पिछले 7 वर्षों में केवल स्पीच और ऑक्यूपेशनल थैरेपी से रोगी की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था. पिछले प्रत्यारोपण के बाद से लड़के की मानसिक स्थिति में भारी सुधार आया है, जिससे एक उम्मीद की एक किरण जगी है की अंततः बच्चे की बीमारी में व्यापक सुधार होगा. वर्त्तमान समय में भारत में ऑटिज्म की घटना तेजी से बढ़ रही है, जो मुख्यतः इन तीन कारणों की वजह से है. 1.. अधिक उम्र में शादी:- अधिक उम्र में शादी के कारण जब महिला 30 साल या उससे ज्यादा उम्र में गर्भवती होती है तो होने वाले बच्चे में आटिज्म की संभावना सामान्य की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है. 2... सजातीय विवाह:- रक्त संबंधों और निकट भाई-बहनों में विवाह. 3...आनुवंशिक परिवर्तन भारत में यह समस्या हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी है. हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में 10 साल से कम उम्र के हर 500 बच्चों में से 1 बच्चे को ऑटिज्म है. इस महामारी में बेहतर देखभाल की जरूरत है. ऐसे कई प्रकाशन आये है जिनमे स्टेम सेल थेरेपी के द्वारा ऑटिज्म की इलाज का समर्थन किया गया है. ऑटोलॉगस बोन मैरो सेल ट्रांसप्लांट के रूप में स्टेम सेल थेरेपी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जहां बोन मैरो को कूल्हे की हड्डी से एकत्र किया जाता है और भारतीय एफडीए द्वारा अनुमोदित किट के साथ संसाधित किया जाता है. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-congress-district-vice-president-talks-to-ee-on-electricity-bill-in-ghatshila/">जमशेदपुर

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मरीजों को अधिक राहत के संकेत

ऑटोलॉगस बोन मैरो सेल कॉन्संट्रेट के अनुप्रयोग ने रीढ़ की हड्डी की चोट, घुटने के गठिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, सेरेब्रल पाल्सी के साथ बच्चों  में  मानसिक और शारीरिक विकास का धीमापन और फेफड़े के फाइब्रोसिस जैसी असाध्य बीमारियों में उत्कृष्ट परिणाम और सुरक्षा दिखाई है. यह प्रक्रिया एएलएस/मोटर न्यूरॉन रोग के प्रबंधन में भी उपयोगी है. चूंकि इस प्रक्रिया में कुछ लागत शामिल है, इसलिए राज्य के सीएम और पीएमएनआरएफ,  गरीब और योग्य रोगियों को इसके लिए इसके लिए वित्तीय सहायता दे रहे हैं. मरीजों को अधिक राहत के संकेत के रूप में विभिन्न बीमा कंपनियों ने कैशलेस या प्रतिपूर्ति की सुविधा देना शुरू कर दिया है. डॉ. राजपूत इस स्टेम सेल थेरेपी प्रक्रिया को महीने में एक बार राज अस्पताल मेन रोड रांची में किया करेंगे.[wpse_comments_template]  

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