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रांची : वर्ल्ड थैलीसिमिया डे पर सदर अस्पताल में हुआ जागरुकता कार्यक्रम

Ranchi : वर्ल्ड थैलीसिमिया डे के मौके पर सोमवार को सदर अस्पताल के थैलीसिमिया डे केयर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान झारखंड के पहले हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन ने अस्पताल में आए थैलीसिमिक बच्चों के अभिभावकों को बीमारी के बारे विस्तृत जानकारी दी. बताया कि थैलीसिमिक बच्चों में ब्लड ट्रांसप्लांट कितना जरूरी है. सामान्य तौर पर एक मनुष्य का हिमोग्लोबिन 12-13 ग्राम होने पर इसे ठीक माना जाता है. जबकि महिलाओं में 11-12 सामान्य है. यदि इससे एक-दो ग्राम भी कम होने पर सामान्य मनुष्य की स्थिति बिगड़ने लगती है, तो सोचने वाली बात है कि एक थैलीसिमिक बच्चे का हिमोग्लोबिन 3-4 ग्राम तक पहुंच जाता है, तो यह कितना खतरनाक है. हिमोग्लोबिन का स्तर ठीक रखने के लिए ही एक-एक थैलीसिमिक मरीज को जरूरत के अनुसार, दो से चार बार तक ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने की आवश्यकता होती है. ब्लड ट्रांसफ्यूजन में देरी के कारण उनकी जान भी जा सकती है.

हिमोग्लोबिन 9 के नीचे आए तो फौरन कराएं ट्रांसफ्यूजन

डॉ. अभिषेक रंजन ने अभिभावकों को बीमारी और बच्चों के ध्यान रखने के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि एक थैलीसिमिक बच्चे को लेकर अभिभावकों की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है. यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कभी भी हिमोग्लोबिन 9 के नीचे आ जाए, तो फैरन मरीज का ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराएं. समय पर खून नहीं चढ़ने के कारण अक्सर देखा जाता है कि बच्चों का शारीरिक ग्राेथ रुक जाता है. मानसिक ग्रोथ भी धीमा हो जाता है. इन बच्चों की लंबाई बढ़नी रुक सकती है. दूसरे अंगों का भी विकास नहीं हो पाता है. इसे भी पढ़ें – रांची">https://lagatar.in/ranchi-state-level-convention-on-may-28-on-14-point-demands-of-working-people/">रांची

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