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रांची : सेंट जेवियर्स कॉलेज में स्वदेशी व सहभागी अनुसंधान पर मंथन, विशेषज्ञों ने रखे विचार

सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची में 23 मार्च से 28 मार्च तक आयोजित संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत 26 मार्च को चौथे दिन “स्वदेशी और सहभागी अनुसंधान पद्धति” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया. इस अवसर पर इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के डॉ. विन्सेंट एक्का और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट, नई दिल्ली के प्रो. वर्जिनियस खाखा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे.
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Ranchi : सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची में 23 मार्च से 28 मार्च तक आयोजित संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत 26 मार्च को चौथे दिन “स्वदेशी और सहभागी अनुसंधान पद्धति” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया. इस अवसर पर इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के डॉ. विन्सेंट एक्का और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट, नई दिल्ली के प्रो. वर्जिनियस खाखा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे.

 

पहले सत्र में डॉ. विन्सेंट एक्का ने कहा कि इंडिजिनस रिसर्च में आदिवासी समुदायों की आवाज, अनुभव और भागीदारी को केंद्र में रखा जाता है. उन्होंने बताया कि पहले आदिवासियों को केवल “शोध विषय” माना जाता था, लेकिन अब वे शोध के साझेदार बन रहे हैं. सामी शोध के उदाहरण के माध्यम से उन्होंने इस बदलाव को स्पष्ट किया.

 

उन्होंने संबंधात्मक उत्तरदायित्व, परंपराओं का सम्मान, समुदाय-केंद्रित और समग्र दृष्टिकोण को इस पद्धति के प्रमुख सिद्धांत बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में जंगल, पहाड़, नदियां और चट्टानें केवल संसाधन नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक महत्व रखती हैं. “आई एम नॉट योर डेटा” के माध्यम से उन्होंने आदिवासी पहचान को केवल आंकड़ों तक सीमित करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया.

 

दूसरे सत्र में प्रो. वर्जिनियस खाखा ने कहा कि जनजातियों को केवल भाषा के आधार पर समझना उचित नहीं है और उन्हें अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय ऐतिहासिक रूप से उपेक्षा और उपनिवेशवाद के प्रभाव से जूझते रहे हैं. उन्होंने इतिहास, कानून और नीतियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए स्व-निर्णय (Self-determination) को आवश्यक बताया. कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सहभागी शोध के माध्यम से ही न्यायपूर्ण और संवेदनशील शोध संभव है.

 

इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर, एसजे, उप-प्राचार्य डॉ. फादर अजय अरुण मिंज, एसजे, विभागाध्यक्ष डॉ. मारकुस बारला सहित डॉ. बी.के. सिन्हा, डॉ. धीरजमणि पाठक, अजीत मेलगांडी, अंशु एन. कुजूर, आशीष रंजन, उत्कर्ष उन्नयन एवं विभिन्न विभागों के प्रतिभागियों के साथ अन्य महाविद्यालयों से आए शिक्षक और शोधकर्ता उपस्थित रहे.

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