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रांची: 1932 के बाद के खतियान को भी स्थानीय नीति में शामिल करने की मांग

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Ranchi: आदिवासी-मूलवासी संयुक्त मोर्चा कोर कमेटी की बैठक शिक्षाविद डॉ करमा उरांव की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई. बैठक में झारखंड सरकार द्वारा 1932 के खतियान के आधार पर तय स्थानीय नीति का स्वागत किया गया. मगर कहा गया कि इसमें 1932 के बाद खतियान को भी इसमें शामिल किया जाए ताकि संपूर्ण झारखंड के लोगों को इसका लाभ मिल सके. स्थानीय नीति के दृष्टि से नियुक्ति नियमावली राज्य सरकार बनाये और पूर्व के नियमावली में सुधार करे. इसे भी पढ़ें–लातेहार">https://lagatar.in/latehar-militants-beat-up-father-in-law-at-the-behest-of-son-in-law/">लातेहार

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नियमावली में सुधार के कई सुझाव

नियमावली में उल्लेखित है कि सामान्य जाति के लोग राज्य के बाहर के स्कूल कॉलेज में शिक्षण ग्रहण करते हैं, तो उन्हें झारखंड के नियोजन में अवसर नहीं मिलेगा. इसे विलोपित किया जाए. आदिवासी-मूलवासी संयुक्त मोर्चा कोर कमेटी ने कहा कि राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया में काफी विलम्ब हुआ है, जिससे शिक्षित युवा वर्ग के आयुसीमा पार कर गई है. ऐसी स्थिति में सभी श्रेणी के अभ्यर्थियों की आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट दी जाए. इन सभी मामलों को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संयुक्त मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल मिलेगा. इसे भी पढ़ें–भारत">https://lagatar.in/bharat-jodo-yatra-rahul-gandhi-said-today-highest-unemployment-in-the-country-in-45-years/">भारत

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ये रहे मौजूद

बैठक को अंतु तिर्की, एस अली, बल्कू उरांव, सुनील सिंह, शिवा कच्छप, धनीनाथ राम साहू, धर्म दयाल साहू, दशमी टोप्पो, सुरेश कुमार पासवान, प्रवीण देवघरिया, रमजान कुरैशी, माधो कच्छप, बहुरा उरांव, गुड्डू उरांव, कुलदीप उरांव, सफ़ी इमाम, सुरेन्द्र कालिंदी रमेश करमाली, अजय कुमार मंडल ने अपने विचार रखे. [wpse_comments_template]
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