साहू गिरोह के सुनील मीणा का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से सीधा संपर्क, वीडियो कॉल पर बात करते तस्वीरें आयी सामने
क्या हुआ था बैठक में
सीएफआरआर और सीएफआर की 41 दावों की स्वीकृति के लिए उपायुक्त सहित सभी सदस्य तो तैयार हो गये, लेकिन डीएफओ रोशन कुमार ने अड़ंगा लगा दिया. वे बार-बार कहने लगे कि लोगों को सामुदायिक वन अधिकार पट्टा दे सकते हैं, लेकिन सीएफआरआर नहीं दे सकते. इससे तो पूरा जंगल ही उजड़ जाएगा, इसका प्रभाव 20 साल बाद देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा था कि हम लोगों को वनों पर अधिकार नहीं दे सकते, क्योंकि जिन्हें पट्टा मिलेगा, तो वे जंगल को उजाड़ देंगे, वे लोग वनों का वैज्ञानिक प्रबंध नहीं जानते हैं. डीएफओ की अड़ंगेबाजी का मामला यहीं नहीं रुका. उन्होंने दबंगई दिखाते हुए डीएलसी का अगले मिनट तैयार कराकर कुछ अधिकारियों से हस्ताक्षर भी करा लिया. जब वरीय अधिकारियों को मामले की जानकारी मिली, तो इसमें हस्ताक्षेप किया. यह पूरा मामला तूल न पकड़े इसलिए सरकार ने एक्शन लेते हुए डीएफओ सिमडेगा को कोडरमा भेज दिया है. इसे भी पढ़ें - रांची">https://lagatar.in/ranchi-ndrf-recovered-the-body-of-the-student-who-drowned-in-jumar-river/">रांची: जुमार नदी में डूब गये छात्र का शव एनडीआरएफ ने बरामद किया [wpse_comments_template]
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