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रांची : राज अस्पताल में डाक्टर ने  पांच साल से पेट में पड़े सिक्के को बिना चीर-फाड़ के निकाला

Ranchi :  राज अस्पताल में हाल ही में डॉ. रवीश रंजन ( एम डी, डी एन बी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) ने चौदह साल की बच्ची के पेट से बिना चीर-फाड़ कर सिक्का निकालने में सफलता हासिल की है. यह सिक्का बच्ची के पेट में पांच साल से पड़ा था.बच्ची का नाम मिस्टी प्रिया है. यह बच्ची डालटनगंज की रहने वाली है. मिस्टी बताती है कि उसने 2016 में पांच रुपये का सिक्का निगल लिया था , तब से उनके माता-पिता परेशान थे. इसे भी पढ़े-हजारीबाग:">https://lagatar.in/hazaribagh-department-of-economics-honored-in-voluntary-blood-donation/">हजारीबाग:

स्वैच्छिक रक्तदान में विभावि का अर्थशास्त्र विभाग सम्मानित इसके लिए उन्होंने बहुत सारे उपाय किये , कई डॉक्टरों को दिखाया किन्तु परिणाम कुछ नहीं निकला. अपने एक परिजन के कहने पर मिस्टी के माता-पिता परामर्श के लिये राज हस्पताल में डॉ. रवीश रंजन के पास आये. डॉ. रवीश रंजन ने मरीज की जांच कर पाया कि सिक्का पेट में फंसा हुआ है. डॉ रवीश रंजन बताते हैं कि अगर सिक्का या अन्य वस्तु पेट या आंत में काफी दिनों तक रह जाता है तो वह चारों तरफ से मांसपेशियों से घिर जाता है. फिर धीरे धीरे वहां घाव बनता जाता है. यह बाद में पेट या आंत में छेद भी कर सकता है. इसे भी पढ़े-शेल">https://lagatar.in/shell-company-case-hearing-on-friday-on-governments-slp-filed-in-sc-against-hc-order/">शेल

कंपनी मामला: HC के आदेश के खिलाफ SC में दायर सरकार की SLP पर शुक्रवार को सुनवाई इसलिए उन्होने एंडोस्कोपी द्वारा इसे निकालने का निर्णय लिया. इलाज के बाद मरीज बिलकुल स्वस्थ है. इलाज के बाद मरीज को तुरंत ही छुट्टी दे दी गयी. डॉ. रवीश रंजन ने कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में सामान्य रूप से सर्जरी के माध्यम से सिक्का या बाहरी वस्तु को बाहर निकाला जाता था, परन्तु राज हस्पताल में अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरण उपलब्ध हैं. जिनके माध्यम से न केवल हम ये देख पाते हैं कि पेट के अंदर किस विशेष हिस्से में समस्या है, बल्कि बहुत सारी परिस्थितियों में हम एंडोस्कोपी के द्वारा ही इस तरह की समस्यों का निदान कर पाते हैं.     [wpse_comments_template]

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