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चिंताजनकः झारखंड की 65 फीसदी मिट्टी पानी के कटाव से हो गई नष्ट

  • पैदावार में भूमि क्षमता का मानक विचलन चार से 10 फीसदी तक
  • जलवायु की उपयुक्तता का पांच से 15 फीसदी हुआ विचलन
  • 54987.26 वर्ग किलोमीटर भूमि हो गई है बंजर
  • अम्लीयता को 3 से 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष डोलामाइट की जरूरत
  • इसरो और एसएसी के मरूस्थलीकरण और भूरक्षण रिर्पोट पर हुआ खुलासा
Ranchi: झारखंड राज्य की कुल भौगोलिक भूमि का 65.00 फीसदी पानी के कटाव के कारण मिट्टी की क्षति हुई है. मिट्टी की उर्वरता में गिरावट तब होती है जब पानी के कटाव के कारण मिट्टी से पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है और पौधों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. झारखंड में 54987.26 वर्ग किलोमीटर भूमि बंजर हो गई है. इसकी अम्लीयता समाप्त करने के लिए तीन से चार क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष डोलामाइट की जरूरत होगी. इसका खुलासा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अहमदाबाद को अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) ने एटलस के जरिये किया है. झारखंड में सबसे अधिक गिरिडीह जिले में 358183 हेक्टेयर भूमि बंजर की चपेट में है.

19 फीसदी जलवायु की उपयुक्तता में हुआ विचलन

राज्य के सभी जिलों में जलवायु की उपयुक्तता में 19 फीसदी का विचलन हुआ है. पहले जलवायु की उपयुक्तता 60 फीसदी से अधिक थी, जो अब घटकर 41 फीसदी हो गई है. सबसे अधिक जलवायु उपयुक्तता सिमडेगा जिले में 82.32 फीसदी है. इसके बाद पाकुड़ में 80.31 फीसदी, पूर्वी सिंहभूम 79.97 फीसदी, दुमका में 73.05 फीसदी, सरायकेला-खरसावां में 71.37 फीसदी, जामताड़ा में 70.36 फीसदी, पश्चिमी सिंहभूम में 68.41 फीसदी और साहिबगंज में 61.65 फीसदी पाई गई है. अब कृषि विभाग बंजर भूमि पर कांटा रहित कैक्टस के पौधे लगाने की योजना पर कार्य कर रहा है. यह पशु चारा के साथ वेगन लेदर निर्माण में भी काम आएगा. फसलों के पैदावार में भूमि का क्षमता का मानक विचलन चार से 10 फीसदी तक हो चुका है. जलवायु की उपयुक्ता का पांच से 15 फीसदी तक विचलन हुआ है. कृषि वानिकी के लिए कितना मानक विचलन ज़िला कृषि वानिकी के लिए मानक विचलन(प्रतिशत) सिमडेगा 9.13 पाकुड़ 5.44 पूर्वी सिंहभूम 5.02 दुमका 7.92 सरायकेला-खरसांवा 4.84 जामताड़ा 5.44 पश्चिमी सिंहभूम 6.69 साहिबगंज 6.33 गोड्डा 5.22 देवघर 4.90 धनबाद 3.82 खूंटी 5.10 बोकारो 6.40 रामगढ़ 4.75 रांची 6.92 गुमला 15.97 गिरिडीह 8.71 पलामू 3.60 लातेहार 9.70 चतरा 5.95 लोहरदगा 8.29 गढ़वा 4.17 हजारीबाग 8.27 कोडरमा 4.08 कितना हुआ है जलवायु की उपयुक्तता का मानक विचलन ज़िला जलवायु उपयुक्तता का मानक विचलन (प्रतिशत) सिमडेगा 9.13 पाकुर 5.44 पूर्वी सिंहभूम 5.02 दुमका 7.92 सरायकेला-खरसांवा 4.84 जामताड़ा 5.44 पश्चिमी सिंहभूम 6.69 साहिबगंज 6.33 गोड्डा 5.22 देवघर 4.90 धनबाद 3.82 खूंटी 5.10 बोकारो 6.40 रामगढ़ 4.75 रांची 6.92 गुमला 15.97 गिरिडीह 8.71 पलामू 3.60 लातेहार 9.70 चतरा 5.95 लोहरदगा 8.29 गढ़वा 4.17 हजारीबाग 8.27 कोडरमा 4.08 कृषि वानिकी के लिए भूमि क्षमता का कितना हुआ है विचलन ज़िला कृषि वानिकी के लिए भूमि क्षमता का मानक विचलन (प्रतिशत) गोड्डा 4.16 गुमला 9.31 हजारीबाग 7.60 दुमका 8.35 कोडरमा 5.84 लातेहार 10.15 लोहरदगा 5.80 पाकुड़ 4.07 पूर्वी सिंहभूम 3.53 रांची 7.73 साहिबगंज 5.02 पश्चिमी सिंहभूम 8.34 बोकारो 3.99 चतरा 9.05 कृषि वानिकी के लिए भूमि की सामाजिक-आर्थिक उपयुक्तता का प्रतिशत ज़िला कृषि वानिकी के लिए भूमि की सामाजिक-आर्थिक उपयुक्तता (प्रतिशत) सिमडेगा 7.03 गुमला 4.28 पश्चिमी सिंहभूम 10.39 लोहरदगा 4.45 खूंटी 5.88 लातेहार 9.10 पाकुड़ 4.71 दुमका 8.41 गढ़वा 4.82 गोड्डा 4.38 साहिबगंज 4.05 पलामू 5.47 जामताड़ा 11.86 रांची 13.07 सरायकेला-खरसांवा 7.64 चतरा 8.18 देवघर 7.93 पूर्वी सिंहभूम 7.02 गिरिडीह 5.03 रामगढ़ 5.67 हजारीबाग 7.53 धनबाद 8.76 बोकारो 2.53 कोडरमा 1.97 [wpse_comments_template]    

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