Ranchi: संसद में पारित एमएमडीआर (MMDR) संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि संशोधन के जरिए राज्यों के खनिज संबंधी अधिकारों को कमजोर किया गया है. जेएमएम ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य के अधिकार वापस नहीं किए गए, तो झारखंड में 1980 के दशक की तर्ज पर आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो आर्थिक नाकेबंदी भी की जाएगी.
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पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद पांडेय ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि विधेयक को खनिज उत्पादक राज्यों झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक से पर्याप्त परामर्श किए बिना राज्यसभा में महज कुछ मिनटों में पारित करा दिया गया. जेएमएम का दावा है कि संशोधन से झारखंड को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा.
पार्टी ने यह भी दावा किया कि केंद्र के पास झारखंड की करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि है, लेकिन नए प्रावधानों के कारण राज्य के लिए इस राशि की वसूली का रास्ता बंद हो जाएगा. जेएमएम ने सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें राज्यों को खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई थी. पार्टी का आरोप है कि संशोधन के जरिए इस अधिकार को भी प्रभावित किया गया है.
जेएमएम नेताओं ने कहा कि खनिज राजस्व में संभावित कमी का असर राज्य की कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है. पार्टी ने आशंका जताई कि मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना तथा शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के संचालन पर भी इसका असर पड़ेगा.
पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चरणबद्ध आंदोलन करेगी. इसकी शुरुआत जनजागरण अभियान से होगी, जिसके बाद धरना-प्रदर्शन और बंद जैसे कार्यक्रम किए जाएंगे. जेएमएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर झारखंड से खनिज संपदा बाहर जाने से रोकने के लिए आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी. साथ ही पार्टी कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है और राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री से मुलाकात का प्रयास करेगी.
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