Ranchi: धुर्वा स्थित ऐतिहासिक बड़कागढ़ रथ यात्रा में गुरुवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. सुबह से ही भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में भक्तो का भीड़ उमड़ पड़ी. मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के जयघोष गूंजता रहा.

इसके अलावा शंखध्वनि पूरा वातावरण गुंजयामान होता रहा. मुख्य पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा अर्चना की. मंदिर के गर्भगृह से सबसे पहले भगवान गरुड़ को रथ पर रखा गया. इसके बाद तीनों विग्रह एक-एक कर गर्भगृह से लाए गए. रथ आकर्षक तरीके सजाए गए थे.
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इस अवसर पर 1001 विष्णु सहस्रनाम का सामूहिक पाठ किया गया, जिसमें हजारों महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए. चार पंक्तियों में बैठकर आस्था से भाग लिए. पूजा-अर्चना के दौरान सभी भक्तों ने पुष्प अर्पित किए. इसके बाद हजारों भक्तों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया.
तीनों विग्रहों को विराजमान कर आठ पहियों वाले विशाल रथ को रस्सियां के सहारे खींचते हुए और जय जगन्नाथ की जय घोष के साथ मौसीबाड़ी पहुंचाये गए. इस दौरान भक्तों ने भगवान के दर्शन व रस्सी को भगवान का साक्ष्य मानकर सुख-समृद्धि की कामना की.
9 दिनों तक मौसीबाड़ी में रहेंगे तीनों विग्रह
भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अब नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में शयनकाल में व्यतीत करेंगे. 25 जुलाई को रथ पर सवार होकर पुन: अपने गंतव्य स्थान जगनाथ मंदिर लाए जाएंगे. इससे पहले मौसीबाड़ी में प्रतिदिन विशेष पूजा, आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों होता रहेगा.
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