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Ranchi News:  जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह 15 को आयेंगे रांची, अबुआ अधिकार कार्यक्रम में लेंगे हिस्सा

राजधानी रांची के बीएनआर होटल में अबुआ अधिकार की ओर से सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें जलपुरुष राजेंद्र सिंह "एनवायरनमेंट चैलेंजस एंड इनाइट्स इन झारखंड” विषय पर अपना व्याख्यान देंगे. कार्यक्रम 15 मई को सुबह 10.00 बजे से शुरू होगा.
 

Lagatar Desk :  राजधानी रांची के बीएनआर होटल में अबुआ अधिकार की ओर से सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें जलपुरुष राजेंद्र सिंह "एनवायरनमेंट चैलेंजस एंड इनाइट्स इन झारखंड” विषय पर अपना व्याख्यान देंगे. कार्यक्रम 15 मई को सुबह 10.00 बजे से शुरू होगा.

 

डॉ राजेंद्र सिंह, जिन्हें "भारत का जलपुरुष" कहा जाता है, एक पर्यावरणविद और  जल संरक्षणवादी हैं, जिन्हें समुदाय-संचालित जल प्रबंधन और नदी पुनर्जीवन में उनके कार्यों के लिए कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है.

 

वहीं देश के जाने माने युवा पर्यावरणविद निरंजन भारद्वाज भी कार्यक्रम में व्याख्यान देंगे. इसके अलावा कई पर्यावरणविद और पर्यावरण  विशेषज्ञइस सेमिनार में शिरकत करेंगे. सेमिनार में राज्य के पर्यावरण से संबंधित ज्वलंत विषयों पर चर्चा होगी.

 

डॉ राजेंद्र सिंह को मिले प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार

पर्यावरण के विशेषज्ञस्टॉकहोम जल पुरस्कार (2015) :  इसे अक्सर "जल का नोबेल पुरस्कार" कहा जाता है. उन्हें जल संरक्षण के लिए किए गए अभिनव प्रयासों और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कई नदियों में जीवनदान देने के लिए यह सम्मान प्राप्त हुआ.


रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2001): एशिया का प्रमुख पुरस्कार, जो पारंपरिक राजस्थानी जल संचयन तकनीकों के माध्यम से खराब हो चुके आवासों के पुनर्वास और निष्क्रिय नदियों को पुनर्जीवित करने में सामुदायिक नेतृत्व के लिए प्रदान किया जाता है.


"अर्थ रिपेयर" पुरस्कार (2019): यह पुरस्कार अमेरिका के सिएटल में प्रदान किया गया, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र के सुधार पर उनके वैश्विक प्रभाव को मान्यता दी गई.


"अहिंसा" पुरस्कार (2018): यह पुरस्कार उन्हें यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा उनके शांतिपूर्ण, समुदाय-नेतृत्व वाले पर्यावरणीय प्रयासों के लिए प्रदान किया गया था.


प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान

डॉ. सिंह को उनके अग्रणी कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें ग्रामीण विकास के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार (2005), पृथ्वी भूषण पुरस्कार (2019), स्वामीराम मानवता पुरस्कार (2023)और भारत अस्मिता राष्ट्रीय पुरस्कार (2024) शामिल हैं.

 

इसके अतिरिक्त, 2008 में द गार्जियन ने उन्हें "ग्रह को बचाने वाले 50 लोगों" में से एक के रूप में शामिल किया था और उन्हें चिर्मुले पुरस्कार (2022) और समाजभूषण पुरस्कार (2024) जैसे कई अन्य पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं.

 

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