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रांची: यात्रियों का सफर हुआ सुरक्षित, रेल मंडल के 26 जोड़ी ट्रेनों में LHB कोच

Vijay Kumar Gope Ranchi: रेल यातायात को सुगम और आधुनिक बनाने की कवायद रेलवे की ओर से लगातार की जा रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ-साथ रेल पटरियों के विस्तारीकरण का काम काफी तेजी से रहा है. पूरे देश के साथ-साथ रांची रेल मंडल के ट्रेनों को भी एलएचबी कोच में परिवर्तन किया जा रहा है. यात्रा के दौरान यात्रियों को ज्यादातर दो रंगों के कोच देखने को मिलते हैं. इसमें एक का रंग गहरा नीला होता है तो दूसरे का रंग लाल होता है. लेकिन कम लोगों को ही इसकी जानकारी होगी कि दोनों कोचों के रंग में ही अंतर नहीं, बल्कि बहुत सी विभिन्नताएं भी हैं. भारतीय रेल मंत्रालय सभी कोचों को एलएचबी कोच में परिवर्तन करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है. इसी दिशा में रांची रेल मंडल भी सभी कोचों को एलएचबी कोच में परिवर्तन करने की दिशा में कवायद शुरू कर दी है. इसे भी पढ़ें-सांसदों">https://lagatar.in/suspension-of-mps-tarnishing-democracy-will-not-bow-down-congress/">सांसदों

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सभी ट्रेनों में लगेंगे एलएचबी कोच 

दक्षिणी पूर्वी रेलवे के रांची रेल मंडल में कुल 66 जोड़ी ट्रेनों के परिचालन कोविड से पहले होता था. वर्तमान में 61 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन हो रहा है, जिसमें से 50 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन है. वही 11 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें हैं. अब तक रांची रेल मंडल की ओर से 26 जोड़ी ट्रेनों को एलएचबी कोच में परिवर्तन किया गया है. एलएचबी कोच में परिवर्तन होने के कारण यात्री, पहले की तुलना में आरामदेह और सुरक्षित यात्रा का अनुभव कर रहे हैं. रांची रेल मंडल अपने सभी ट्रेनों को एलएचबी कोच में तब्दील करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. यात्री सुविधा के मद्देनजर रेलवे बोर्ड के निर्देश पर यह कदम उठाया जा रहा है.

दुर्घटना के दौरान यात्री रहेंगे सुरक्षित

एलएचबी कोच का उपयोग सिर्फ एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस जैसी तेज गति से चलने वाली ट्रेनों में किया जाता था. लेकिन बाद में भारतीय रेलवे ने सभी आईसीएफ कोच को जल्द से जल्द अपग्रेड करने का फैसला किया है. एलएचबी कोच सुरक्षा, गति क्षमता, आराम मामलों में नीले रंग के आईसीएफ कोच से बेहतर है. दुर्घटना के दौरान आईसीएफ कोच के डिब्बे एक दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं। क्योंकि इसमें डुअल बफर सिस्टम होता है. वहीं, एलएचबी कोच दुर्घटना के दौरान एक दूसरे पर नहीं चढ़ते क्योंकि इसमें सेंटर बफर कॉलिंग सिस्टम लगा होता है. इससे जान माल की कम हानि होती है. इसे भी पढ़ें-बिहारः">https://lagatar.in/bihar-tej-pratap-got-angry-after-watching-the-film-prithviraj-said-this-by-tweeting/">बिहारः

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एलएचबी कोच जर्मनी के लिंक-होफमैन-बुश द्वारा तैयार

आईसीएफ कोच एक पारंपरिक रेलवे कोच हैं जिसका डिजाइन आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री), पेराम्बुर, चेन्नई, भारत द्वारा विकसित किया गया था. वहीं, एलएचबी कोच को जर्मनी के लिंक-होफमैन-बुश द्वारा तैयार किया गया, जिसके बाद से इसका निर्माण भारत में ही किया जा रहा है. आईसीएफ कोच के स्लीपर क्लास में 72 सीट होती हैं जबकि एसी-3 क्लास में 64 सीटें मौजूद होती हैं. वहीं, एलएचबी कोच ज्यादा लंबे होते हैं. यही कारण है कि इसके स्लीपर में 80 सीट और थर्ड एसी कोच में 72 सीट होती हैं. [wpse_comments_template]

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