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रांची : लगातार न्यूज में ‘प्रेरणा संवाद’ का आयोजन, महिलाओं ने साझा की प्रेरणादायक कहानियां

Ranchi : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रांची स्थित लगातार न्यूज कार्यालय में ‘प्रेरणा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय कई प्रमुख महिलाओं ने भाग लिया और अपने जीवन के अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियां साझा कीं. कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मजागरूक बनने के लिए प्रेरित करना था.

 

कार्यक्रम में डॉ. रेखा देबुका ने कम उम्र में होने वाले विवाह और उससे जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कम उम्र में शादी होने पर लड़कियों को बहुत कम उम्र में ही गर्भावस्था और जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है, जिसका असर उनके स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ता है. उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बतायी.

 

वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रीता कच्छप ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं. उन्होंने कहा कि कई बार लोग घर पर ही स्वयं दवा लेने लगते हैं, जो सही नहीं होता. जब तक बच्चे को अस्पताल लाया जाता है, तब तक स्थिति कई बार गंभीर हो चुकी होती है. इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है.

 

सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति मुंडा ने बताया कि वह लंबे समय से वंचित बच्चों और महिलाओं की शिक्षा के लिए काम कर रही हैं. साथ ही उन्होंने महिलाओं को सिलाई जैसे कौशल सिखाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का काम भी किया है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें. जयश्री देवी, जिन्होंने अपनी सोहराय कला को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है, ने कहा कि लोक कला को बढ़ावा देने के लिए इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी परंपरागत कला और संस्कृति से जुड़ सके.

 

वहीं मेरी स्मृति कुजूर, जिन्होंने बॉलीवुड में सहायक फैशन डिजाइनर के रूप में काम किया है, ने अपने संघर्ष और अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत और धैर्य की आवश्यकता होती है. कार्यक्रम के दौरान ज्योति वंदना लकड़ा ने बताया कि उन्होंने अब तक 1000 से अधिक लोगों को ऑनलाइन कुरुख भाषा सिखायी है. वह कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और झारखंड की कला एवं संस्कृति को हर मंच पर आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करती रहती हैं.

 

पूनम उरांव और सुषमा केरकेट्टा ने बताया कि वे गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षित कर समाज में एक नई और मजबूत नींव तैयार करने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने कहा कि कई बार दूसरों के लिए अच्छा काम करने के बावजूद लोगों की गलत बातें भी सुननी और सहनी पड़ती हैं, लेकिन इसके बावजूद समाज के लिए काम करना जारी रखना जरूरी है.

 

प्रतिभा जी ने अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि कोविड के दौरान पति के गुजर जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद को संभाला और आज तक अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं.

 

रूबी धवन, जो एक शिक्षिका और उद्यमी दोनों हैं, ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कई बार महिलाओं का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी उनका अपना पति ही बन जाता है. समाज में अक्सर पुरुषों के काम को केवल बाहरी जिम्मेदारियों तक सीमित माना जाता है, जबकि महिलाओं का काम घर के बाहर और घर के भीतर दोनों जगह चलता रहता है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति ऐसी है जिससे शायद ही कोई महिला अछूती रही हो.

 

वहीं हुमा जी ने कहा कि शादी और बच्चों के बाद भी महिलाओं के लिए अपनी अलग पहचान बनाना बेहद जरूरी है. कार्यक्रम में सविता जी, जो पहले अधिवक्ता रह चुकी हैं, अब चैपलिन विधि के माध्यम से स्पिरिचुअल हीलिंग द्वारा कई लोगों की मदद कर रही हैं.

 

इस अवसर पर सभी महिलाओं ने आत्मजागरूकता, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को महिलाओं की प्रगति का आधार बताते हुए अपने विचार साझा किये. कार्यक्रम के दौरान कई प्रेरणादायक अनुभव सुनने को मिले और अंत में लगातार टीम द्वारा सभी प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया.

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