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रांची रिंग रोडः 200-400 रुपया दो, बोतल लाओ - छक कर पीओ

 
Ranchi: एक सवाल- रांची रिंग रोड पर कितने लाइसेंस वाले बार हैं. जवाब है- 4-5. लेकिन यह जवाब गलत है. रिंग रोड पर खुले 90 प्रतिशत होटल और रेस्टूरेंट में बार से अधिक शराब खप रहा है.  रिंग रोड के किसी भी होटल में बैठकर कोई भी कभी भी शराब पी सकता है. अपनी बोतल लेकर जाने पर फीस देनी पड़ती है. यह फीस 200 से 400 रुपये प्रति बोतल तक है. ना उत्पाद विभाग का डर और ना ही पुलिस का खौफ. 
हाईवे के होटलों में पहले भी लोग शराब पीते थे, लेकिन छुप-छिपा कर. अब ऐसा नहीं है. सब कुछ खुल्लम-खुल्ला. रेस्टूरेंट के स्टाफ साफ कहते हैं- क्या उत्पाद विभाग और क्या पुलिस. सब के सब सेट हैं.
[caption id="attachment_1037399" align="aligncenter" width="170"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2025/04/ranchi-ring-road.png"

alt="" width="170" height="113" /> इस सांकेतिक तस्वीर को तैयार करने में AI की मदद ली गई है.[/caption] जानकारी के मुताबिक रांची रिंग रोड पर 4-5 बार भी खुले हैं. जिनके पास लाइसेंस हैं. पर वहां शराब पीने पर पैग के हिसाब से रेट लगता है और महंगा पड़ता है, इसलिए लोग 200-400 रुपया प्रति बोतल देकर होटलों व रेस्टूरेंट में शराब पीते हैं.  कल आपने पढ़ाः- http://GST

लिए बिना बिल बनाता है रिंग रोड का कान्हा हाइवे किचन GST">https://lagatar.in/ring-roads-kanha-highway-kitchen-makes-bill-without-gst/">GST

लिए बिना बिल बनाता है रिंग रोड का कान्हा हाइवे किचन
बार मालिक शराब बेचने के लिए सरकार को प्रति माह एक तय रकम देते हैं, वहीं होटल व रेस्टूरेंट मालिक सरकार को बिना कोई रकम दिए लोगों से फीस लेकर शराब बेचने की सुविधा देते हैं. जो गैरकानूनी है. इसका उन्हें बड़ा फायदा यह होता है कि उनके यहां खाने वालों की लाईन लगी रहती है. शाम से देर रात तक.
अगर आप ऐसा सोंचते हैं कि अगर शराब की बोतल लेकर नहीं गए तो आप नहीं पी पाएंगे, तो बिल्कुल गलत है. बस आपको 200 से 300 रुपये प्रति बोतल अधिक देने पड़ेंगे. होटल-रेस्टूरेंट मालिक आपको आपके ब्रांड का शराब उपलब्ध करा देगा. कुछ खरीद करके लाकर देगा, तो कुछ अपने पास ही खरीद करके रखता है. बीयर के लिए प्रति बोतल 20-25 रुपये अधिक देने पड़ेंगे.
सवाल उठता है कि आखिर रिंग रोड के होटलों व रेस्टूरेंट संचालकों को किसी का डर क्यों नहीं. क्योंकि उत्पाद विभाग या पुलिस इनके यहां छापामारी करने जाते ही नहीं. जीएसटी विभाग भी सोया हुआ है. अधिकांश होटल व रेस्टूरेंट में तो बिना जीएसटी के ही कस्टमर से बिल लिया जाता है. 
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