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रांची : अवैध खनन मामले में ईडी ऑफिस नहीं पहुंचे साहेबगंज डीसी

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Ranchi: 1250 करोड़ के अवैध खनन घोटाला मामले साहेबगंज डीसी रामनिवास यादव गुरूवार को ईडी ऑफिस नहीं पहुंचे. इसके अलावा रांची जेल के हवलदार अवधेश कुमार को भी ईडी के समक्ष उपस्थित होना था. वो भी ईडी ऑफिस नहीं आए. ईडी ने दोनों से पूछताछ की तैयारी कर रखी थी. लेकिन ईडी के अधिकारी इंतजार ही करते रह गए. बीते छह जनवरी को ईडी ने समन जारी करते हुए सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू को 16 जनवरी, साहिबगंज डीसी रामनिवास यादव को 11 जनवरी और विनोद सिंह को 15 जनवरी को ईडी ऑफिस में पूछताछ के लिए हाजिर होने को कहा था. इसे भी पढ़ें -अवैध">https://lagatar.in/ed-will-interrogate-dahu-yadavs-son-for-five-days-in-illegal-mining-case/">अवैध

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एक साथ 12 ठिकानों पर ईडी ने की थी छापेमारी

साहिबगंज में 1250 करोड़ के अवैध खनन और ईडी के गवाह विजय हांसदा को प्रभावित करने से जुड़े मामले में ईडी ने बीते तीन जनवरी को बड़ी कार्रवाई की थी. ईडी ने एक साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू, साहिबगंज के डीसी रामनिवास यादव, डीएसपी राजेंद्र दुबे, साहिबगंज के खनन कारोबारी खुदानिया बंधु, मुख्यमंत्री के दोस्त विनोद कुमार सिंह, रौशन सिंह, कोलकाता के कारोबारी अभय सरावगी, पूर्व विधायक पप्पू यादव, रांची के बिरसा मुंडा जेल के जमादार अवधेश कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान शेल कंपनियों के जरिए निवेश, संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के साक्ष्य एजेंसी को मिले हैं. बरामदगी के आधार पर ही ईडी अब आगे की कार्रवाई कर रही है.

कैबिनेट के निर्णय को बता सकते हैं नहीं आने का आधार

माना जा रहा है कि साहिबगंज डीसी के एजेंसी के सामने हाजिर नहीं होने को लेकर कैबिनेट के फैसले को आधार बना सकते हैं. गौरतलब है कि पिछले कैबिनेट की बैठक में राज्य के बाहर की एजेंसियों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था. प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार के पदाधिकारियों को राज्य के बाहर की किसी भी एजेंसी से समन या नोटिस मिलता हो तो इसकी सूचना अपने विभागीय प्रधान को देना है. विभागीय प्रधान का यह दायित्व होगा कि बिना किसी विलंब के ऐसे मामलों की तथ्यपरक सूचना मंत्रिमंडल सचिवालय - निगरानी विभाग को उपलब्ध कराए. निगरानी विभाग को ऐसे मामलों के लिए नोडल विभाग बनाया गया है. नोडल विभाग सूचना प्राप्त होने पर प्रस्तुत तथ्यों के आलोक में आगे की कार्रवाई के लिए विधि या कानूनी परामर्श लेगा. परामर्श के बाद ही राज्य के बाहर की जांच एजेंसी को वांछित कार्रवाई में राज्य के पदाधिकारी आवश्यक सहयोग दे पाएंगे. इसे भी पढ़ें -साहिबगंज">https://lagatar.in/cabinet-secretary-wrote-a-letter-ed-on-summons-to-sahibganj-dc-and-abhishek-prasad-pintu-said-there-is-ambiguity-in-fir/">साहिबगंज

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