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रांचीः रमजान का दूसरा जुमा, मस्जिदों में उमड़ी भीड़

Ranchi: पवित्र रमजान माह के दूसरे जुमे पर मस्जिदों में रोजेदारों- नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही लोग जुमे की नमाज पढ़ने की तैयारी में थे. अधिकांश नमाजी सफेद कपड़े पहने हुए थे, बुजुर्ग और युवा सभी में गजब का उत्साह था. दोपहर 12 बजे के बाद से नहा धो, पाक पवित्र हो सुरमा व इत्र लगाकर मस्जिद जाने वाली सड़कों पर केवल नमाजियों की भीड़ ही दिखाई दे रही थी. नमाज के समय से पूर्व मस्जिद पहुंच कर ही अपना स्थान सुनिश्चित कर लेना चाह रहे थे. वैसे तो मस्जिद प्रबंधन की ओर से नमाज पढ़ने वालों के लिए मुकम्मल व्यवस्था की गई थी. मस्जिद की छतों व सामने की सड़क पर दरी बिछाई गई थी.

वजु के पानी की थी व्यवस्था

मस्जिदों में वजु के लिए अलग से पानी की व्यवस्था की गई थी, मस्जिद प्रबंधन की ओर से लोगों से अपील की गई थी कि मस्जिदों के आस पास रहने वाले घरों से ही वजु बना कर आये ताकि दूर दराज से आने वाले लोगों को वजु करने में परेशानी ना हो.

अमन-भाईचारगी की हुई दुआ

विभिन्न मस्जिदों में नमाज के बाद दुआ की गई. जिसमें मुल्क में अमन-शंति, भाईचारगी के लिये दुआ की गई. पुलिस बलों की तैनाती, मस्जिदों के आस पास प्रशासन की ओर से विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिये मस्जिदों के आस पास पुलिस बल की तैनाती की गई थी.

इन मस्जिदों में हुई नमाज

अपर बाजार जामा मस्जिद, मेन रोड इकरा मस्जिद, डॉ फतेउल्लाह मस्जिद, अहले हदीस मस्जिद कर्बला चौक, हव्वारी मस्जिद, पुरानी रांची मस्जिद, थड़पखना मस्जिद, बरियातु मस्जिद, हिंदपीढ़ी तस्लीम मस्जिद, बड़ी मस्जिद, छोटी मस्जिद, मक्का मस्जिद, मदीना मस्जिद, मस्जिद ए अकबरिया, मस्जिद ए उमर फारुक, इस्लामी मरकज, हरमू मस्जिद हामीम, पहाड़ी टोला मस्जिद, पुंदाग मस्जिद, कांटा टाेली मस्जिद ए असरा, आजाद बस्जिद मस्जिद, पत्थलकुदवा मस्जिद, डोरंडा मस्जिद, कडरु मस्जिद, रहमत कॉलोन मस्जिद, इलाही नगर मस्जिद आदि में रमजा के दूसरे जुमे की नमाज अदा हुई.

सही हकदार को ही मिले फितरा-जकात : मौलाना माजिद

मौलाना अब्दुल माजिद ने फितरा जकात हर मालदार को देना वाजिब (जरूरी) है. लेकिन किसे दें रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए. सही मायने में गरीब, जरुरतमंद, परेशान हो, उसे ही फितरा-जकात दें. अपने अपने दूर के रिश्तेदार, आस पास देंखे, अपने मुहल्ले में देखें, आप अपने रिश्तेदार को दें लेकिन जरूरी नहीं की उन्हें बताएं की यह फितरे-जकात की रकम दिया है. बिन कछ बताएं देने पर भी उसका सवाब मिल जाएगा. लेकिन सही हकदार को ही मिलना चाहिये. [wpse_comments_template]

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