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रांची : विश्व पृथ्वी दिवस पर उषा मार्टिन विश्वविद्यालय में छात्र-नेतृत्व में नवाचार

उषा मार्टिन विश्वविद्यालय में विश्व पृथ्वी दिवस 2026 के अवसर पर कृषि संकाय द्वारा एक सुव्यवस्थित कार्यक्रम का आयोजन किया गया. "Our Power, Our Planet" थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने मिलकर पर्यावरण जागरूकता और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया.
 

Ranchi : उषा मार्टिन विश्वविद्यालय में विश्व पृथ्वी दिवस 2026 के अवसर पर कृषि संकाय द्वारा एक सुव्यवस्थित कार्यक्रम का आयोजन किया गया. "Our Power, Our Planet" थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने मिलकर पर्यावरण जागरूकता और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया.

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कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. मधुलिका कौशिक ने किया. इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा और दैनिक जीवन में पर्यावरणीय जागरूकता को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मॉडल प्रदर्शनी रही, जिसमें विद्यार्थियों ने नवाचार और शोध आधारित कई परियोजनाएं प्रस्तुत कीं. इनमें जल अपरदन एवं उसके नियंत्रण के उपाय जैसे कंटूर क्रॉपिंग और मल्चिंग, आधुनिक तकनीकें जैसे हाइड्रोपोनिक्स, एरोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग, साथ ही वर्षा जल संचयन, वाटरशेड विकास और पवन अपरदन प्रबंधन जैसे व्यावहारिक समाधान शामिल थे.

 

इसके अलावा टेरारियम निर्माण, बॉटल गार्डनिंग, संरक्षित खेती और ग्रास्ड वाटरवे जैसे मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जो वैज्ञानिक समझ के साथ स्थानीय जरूरतों को भी दर्शाते हैं.

 

प्रदर्शनी में विभिन्न सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई. इसमें याशी सिंह, ईशा कुमारी, क्षितिज, तन्नु कुमारी, निशा चटर्जी, प्रेरणा रंजन, दिव्यांशु, सूर्यकांत हेम्ब्रम, आकाश कुमार गिरी, भानुप्रिया, नेहा राज, रोहित कुमार, प्रियांशु कुमार साहू, सूरज कुमार कश्यप, वैष्णवी कुमारी, ईशु ठाकुर, कनिका, शिल्पी कुमारी और ऋचा कुमारी सहित कई विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि और जलवायु अनुकूलन से जुड़े विषयों पर अपने मॉडल प्रस्तुत किए.

 

इसके साथ ही ‘वैल्यू एडेड फूड एग्जीबिशन कम सेलिंग स्टॉल’ ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया. विद्यार्थियों ने रागी और मोरिंगा कुकीज, मोरिंगा पाउडर, स्टीविया पाउडर, तरबूज के बीज से बनी कैंडी और रागी आधारित हेल्दी चिप्स जैसे पौष्टिक एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार कर प्रस्तुत किए. यह पहल सतत खाद्य प्रणाली, पारंपरिक सुपरफूड के प्रोत्साहन और स्वस्थ आहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई.

 

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवादात्मक शैक्षणिक माहौल बना, जहां पर्यावरणीय मुद्दों पर विचार-विमर्श और नए विचारों को प्रोत्साहन मिला. यह आयोजन विश्वविद्यालय के उस व्यापक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान और सामुदायिक गतिविधियों में सतत विकास को शामिल किया जा रहा है. कार्यक्रम का सफल संचालन प्रिया प्रियंका टुडू और जूही चंद्रा द्वारा किया गया.

 

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