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रांचीः पहाड़ी मंदिर से आदिवासियों का पुराना नाता, नयी कमेटी में मिले प्रतिनिधित्व- अजय तिर्की

 
Ranchi: केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सूचना अनुसार पहाड़ी मंदिर कमेटी का पुनर्गठन किया जा रहा है. इस गठित कमेटी में आदिवासियों को भी उचित प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी मिलनी चाहिए. रांची के सभी पुराने वंशिदों को अच्छी तरह ज्ञात होगा कि नागवंशी राजा के समय से ही पहाड़ी मंदिर के नाग गुफा में आदिवासी पूजा-अर्चना करते आए हैं. सरना धर्म के पाहनों द्वारा ही नागदेवता की पूजा-अर्चना की जाती थी. पूरे पहाड़ी परिसर को रिची बुरू के नाम से भी ऐताहसिक रूप से जाना है. पहाड़ी परिसर को आदिवासी रिची बुरू के नाम से पुकारते और संबोधित करते थे. इसे पढ़ें- शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-18-sept-2023-jharkhand-news-updates/">शाम

की न्यूज डायरी।।18 SEPT।।पीएचडी स्टूडेंट की गुहार सुनिए वीसी साहब।।लोकपाल मामलाःशिबू को राहत बरकरार।।रिश्वत लेते एसआई धराया।।समय पूर्व चुनाव की तैयारी में है केंद्र- नीतीश।।संसद का विशेष सत्र छोटा पर मूल्यवान- पीएम।।समेत कई अहम खबरें।।
आजादी के पूर्व जब आदिवासी अंग्रेजों से लोहा लेते थे, पहाड़ी मंदिर के ऊपर बने फांसी टुंगरी में आदिवासियों एवं अन्य लोगों को फांसी दी जाती थी. इसलिए पहाड़ी मंदिर से आदिवासियों का नाता और पारंपरिक रिश्ता को भुलाया नहीं जा सकता है. तिर्की ने कहा कि एक समय में आदिवासी ही पहाड़ी मंदिर और इसके घनघोर जंगल की रक्षा भी करते थे. यह भी सभी को ज्ञात होगा कि पहाड़ी के ऊपर मंदिर बहुत बाद में बनी, इसके बाद हिंदू धर्म के लोग पूजा-पाठ शुरू किया. पहाड़ी मंदिर का विकास का मसला हो या फिर इसके कमेटी का. सभी में स्थानीय आदिवासियों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इसलिए हम आदिवासी समाज के लोग पहाड़ी मंदिर कमेटी के पुनर्गठन में उचित भागीदारी और प्रतिनिधित्व की मांग करते हैं. हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड, सरकार और प्रशासन आदिवासियों की इस मांग पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए उचित सम्मान और भागीदारी सुनिश्चित करेंगे, ऐसा आदिवासी समाज उम्मीद करता है. इसे भी पढ़ें- भू-अर्जन">https://lagatar.in/ranchi-dc-gave-instructions-to-expedite-matters-related-to-land-acquisition/">भू-अर्जन

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