साहित्य के बिना पत्रकारिता नहीं हो सकती-पंकज भूषण
साहित्योदय के संस्थापक पंकज भूषण प्रियम कहा कि साहित्य के बिना पत्रकारिता नहीं हो सकती, साहित्यकारों में भी कल्पनाशीलता होती है और पत्रकारों में भी. साहित्योदय के अंतर्गत साहित्य संग्राम कार्यक्रम के सवा सौ एपिसोड चले. साहित्य और पत्रकारिता को जोड़ने का यह अनूठा प्रयास था. इसे भी पढ़ें–दिल्लीः">https://lagatar.in/delhi-cm-hemant-soren-meets-p-chidambaram/">दिल्लीःसीएम हेमंत ने की पी चिदंबरम से मुलाकात
“काश कहीं मैं मुर्दा होता...! न सुख की चिंता होती, न ही गम का पता होता”
वहीं डीन एमिटी यूनिवर्सिटी एकेडमिक अजीत कुमार पांडे ने कहा कि साहित्य के उदय को साहित्योदय शब्द परिभाषित करता है. उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, एस सक्सेना, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और अन्य प्रमुख साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य के विचार प्रक्रिया को ये कलमकार प्रभावित करते हैं उन्होंने अपनी कविता- काश कहीं मैं मुर्दा होता...! न सुख की चिंता होती, न ही गम का पता होता, सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया.alt="" width="600" height="400" />
संजय सेठ ने अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद
सांसद संजय सेठ ने अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में बताया कि कैसे उन्होंने अपने शब्दों से हजारों लोगों को प्रभावित किया और कहा कि उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद की जो महंगी किताबें नहीं खरीद सकते, इसलिए उन्होंने एक बुक बैंक खोलकर उन्हें वितरित किया.हर्षित तिवारी को पहला स्थान
रांची प्रभारी डॉ रजनी शर्मा चंदा ने एमिटी विश्वविद्यालय झारखंड के प्रयासों की सराहना की और पिछले पांच वर्षों से शुरू की गई अपनी सभी पुस्तकों को दान करने की घोषणा की. कविता प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हर्षित तिवारी, द्वितीय स्थान सोनाली और तृतीय स्थान ऋतिक राज को मिला. धन्यवाद ज्ञापन सुधीर कुमार ने किया. इसे भी पढ़ें–रांची">https://lagatar.in/ranchi-district-congress-party-took-out-gratitude-journey-rajesh-thakur-joined/">रांचीजिला कांग्रेस पार्टी ने निकाली आभार यात्रा, राजेश ठाकुर हुए शामिल











































































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