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रांची : साहित्योदय के पांचवें स्थापना दिवस पर दो पुस्तकों का विमोचन

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  • आभा मनोज सिंह का लघु उपन्यास "मालती" और सविता गुप्ता की पुस्तक "काव्य कलश" का लोकार्पण
Ranchi : साहित्य और संस्कृति के लिए सक्रिय साहित्योदय मंच का पांचवां स्थापना दिवस सफलतापूर्वक मनाया गया. मंच के संस्थापक पंकज भूषण प्रियम ने साहित्योदय के पांच वर्ष पूरे होने पर सभी रचनाकारों और मंच से जुड़े लोगों को हार्दिक बधाई दी. इसी बैनर तले आभा मनोज सिंह का लघु उपन्यास "मालती" और सविता गुप्ता की पुस्तक "काव्य कलश" का लोकार्पण किया गया. साथ ही अमिटी यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए काव्य प्रतियोगिता आयोजित की गई. काव्यपाठ प्रतियोगिता श्रेष्ठ कवि और नामचीन साहित्यकारों के संरक्षक मंडल के सामने आयोजित की गयी. साहित्योदय कार्यक्रम में विशिष्ट और मुख्य अतिथि के तौर पर सांसद संजय सेठ के अलावा अध्यक्ष पंकज प्रियम, संजय करुणेश, सुरेंद्र उपाध्याय, सारिका भूषण, अनिता रश्मि डॉ रजनी शर्मा आदि उपस्थित थीं. साथ ही साथ डीन एकेडमिक एमिटी यूनिवर्सिटी के अजीत कुमार पांडे भी मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन राकेश रमण और खुशबू बरनवाल सीपी ने किया. साहित्योदय के संस्थापक पंकज भूषण प्रियम ने कहा कि साहित्य के बिना पत्रकारिता नहीं हो सकती, साहित्यकारों में भी कल्पनाशीलता होती है और पत्रकारों में भी.
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साहित्य संग्राम कार्यक्रम के सवा सौ एपीसोड चले

साहित्योदय के अंतर्गत साहित्य संग्राम कार्यक्रम के सवा सौ एपीसोड चले. साहित्य और पत्रकारिता को जोड़ने का यह अनूठा प्रयास था. डीन एमिटी यूनिवर्सिटी एकेडमिक अजीत कुमार पांडे ने कहा कि साहित्य के उदय को साहित्योदय शब्द परिभाषित करता है. उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, एस सक्सेना, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और अन्य प्रमुख साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य के विचार प्रक्रिया को ये कलमकार प्रभावित करते हैं. उन्होंने अपनी कविता-
काश कहीं मैं मुर्दा होता...!
न सुख की चिंता होती,न ही गम का पता होता, सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया.

बच्चों की मदद की जो महंगी किताबें नहीं खरीद सकते- संजय सेठ

सांसद संजय सेठ ने अटल बिहारी बाजपेयी के बारे में बताया कि कैसे उन्होंने अपने शब्दों से हजारों लोगों को प्रभावित किया और कहा कि उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद की जो महंगी किताबें नहीं खरीद सकते, इसलिए उन्होंने एक बुक बैंक खोलकर उन्हें वितरित किया. रांची प्रभारी डॉ रजनी शर्मा चंदा ने एमिटी विश्वविद्यालय झारखंड के प्रयासों की सराहना की और पिछले पांच वर्षों से शुरू की गई अपनी सभी पुस्तकों को दान करने की घोषणा की. कविता प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हर्षित तिवारी, द्वितीय स्थान सोनाली और तृतीय स्थान ऋतिक राज को मिला. धन्यवाद ज्ञापन सुधीर कुमार ने किया.
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