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रांची विश्वविद्यालय के शोधार्थी 21 जुलाई को करेंगे तालाबंदी, नये नियम को बताया ‘मृत्युदंड’

Rajnish Prasad Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने 21 जुलाई को राज्यभर के विश्वविद्यालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी करने की घोषणा की है. तालाबंदी में झारखंड के सभी छात्र संगठन, शोधार्थी, अनुबंध व्याख्याताओं और अतिथि शिक्षकों ने समर्थन किया है. सहायक प्रध्यापक बहाली के लिए नए नियम बनाए गए हैं जिसका विरोध लगातार शोधार्थी करते आ रहे हैं. शोधकर्ताओं ने इस नियमावली को झारखंड से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए मृत्यु दंड कहा है. उनका कहना है कि यह झारखण्ड से उच्च शिक्षा को खत्म करने का सुनियोजित षडयंत्र है. अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने रांची विश्विद्यालय के मोरहाबादी कैंपस के बाहर उच्च शिक्षा सचिव के. के. खंडेलवाल का पुतला फूंका.

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कुलपति ने राज्यपाल को लिखा पत्र

शोधार्थियों ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत कुमार सिंहा से मुलाकात की, कुलपति ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बताया कि यह नीति किसी भी दिशा से न तो झारखण्ड के छात्रों और शोधार्थियों के पक्ष में है और न ही यू.जी.सी. के नियमों के अनुकूल है.

बाबूलाल मरांडी से मिले शोधार्थी

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली के विरोध का मामला अब राज्य भर में तूल पकड़ चुका है, मंगलवार को राज्य भर के शोधार्थियों ने अलग-अलग जगहों अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई. सुबह अनुबंध सहायक प्राध्यापकों ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर अपनी बात रखी, उन्होंने इस नियम की निंदा की. मरांडी ने भरोसा दिलाया कि इस नियम को कभी भी सदन से पास नहीं होने दिया जाएगा.

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