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“सरायकेला छउ के पारंपरिक रूप का प्रयोग”
इसके कोरियोग्राफर पद्मश्री शशधर आचार्य हैं जिन्होने देश ही नहीं पूरी दुनिया में सरायकेला छउ का डंका बजाया है. उनका कहना है कि भास के नाटकों में प्रयोग करने की पूरी गुंजाइश है और इसमें भी सरायकेला के छउ के पारंपरिक रूप को बरकरार रखते हुए कई प्रयोग किए हैं जिसमें नांदी पाठ और भरत वाक्य जो कि पारंपरिक नाटक के आरंभ और अंत में होता है, उसके जगह में सरायकेला छउ की परंपरा को लिया गया है. नाटक में संगीत झारखंड के जाने माने कलाकार नाथू महतो ने दिया है. एनएसडी सिक्किम के केंद्र निदेशक विपिन कुमार ने बताया कि सिक्किम शाखा के एक साल के कोर्स में एक महीने के लिए देश के किसी भी हिस्से के परंपरागत कला का प्रशिक्षण दिया जाता है और ये उसी की कड़ी है. इसे भी पढ़ें-चाईबासा">https://lagatar.in/dhanbad-88-girl-students-of-sslnt-college-got-free-eye-test/">चाईबासा: कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर में कुल 95 लोगों का हुआ निबंधन
आर्यभट्ट सभागार नहीं मिलने से निदेशक आहत
विपिन कुमार मूल रुप से झारखंड के चंद्रपुरा के ही हैं और झारखंड में रंगमंच के विकास के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं लेकिन इस बार इन्हें बहुत कड़वे अनुभव का सामना करना पड़ा, जब राँची के आर्यभट्ट सभागार का आरक्षण रद्द हो गया जो कि जून में ही कराया गया था. विपिन कुमार बताते हैं कि जब वे आर्यभट्ट सभागार देखने गए तो उन्हें बताया गया कि उनका आरक्षण रद्द कर दिया गया है और नाटकों के लिए सभागार नहीं दिया जाएगा. इसके बाद जब वे राँची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजित कुमार सिन्हा के पास गए जिसमें उनके साथ प्रसिद्ध रंगकर्मी और राँची विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर अजय मलकानी भी थे तो कुलपति महोदय ने उन्हें बैठने तक नहीं कहा, उनकी एक ना सुनी और सभागार देने से साफ मना कर दिया. विपिन कुमार जो खुद राँची विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं, इससे काफी आहत हैं और कहते हैं कि आखिर ऐसे में रंगमंच का विकास कैसे होगा. आखिरी समय में मंचन स्थल को आर्यभट्ट के बजाए आड्रे हाउस किया गया. इसे भी पढ़ें-रांची:">https://lagatar.in/ranchi-sawan-queen-became-poetry-in-sawan-festival-women-danced-on-song-and-music/">रांची:सावन महोत्सव में कविता बनीं सावन क्वीन, गीत-संगीत पर थिरकीं महिलाएं [wpse_comments_template]

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