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"विहंगम योग सशक्त साधना पद्धति"
इस मौके पर संत नामदेव महाराज ने बताया कि विहंगम योग अपनी सशक्त साधना पद्धति के लिए जाना जाता है. यह एक ऐसी पद्धति है जिससे 15 मिनट के नियमित अभ्यास द्वारा पूर्ण आत्मिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है. इस पद्धति के अभ्यास हेतु कोई असामान्य जीवनशैली अपनाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि विहंगम योग संस्था की स्थापना 1924 में सद्गुरू सदाफल देव जी महाराज ने की थी. देश विदेश में आज सैकड़ों केंद्र व लाखों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं. विहंगम योग संस्थान देश में कई केंद्र संचालित कर लोगों को योग के माध्यम से स्वस्थ, उत्तम, और खुशी जीवन शैली जीने की कला सिखलाने का काम कर रही है. उन्होंने बताया कि विहंगम योग की साधना करनेवाला मानव कभी दुखी नहीं रह सकता, क्योंकि वह जीवन के सार को समझ जाता है. महर्षि सदाफल देवजी महाराज ने अपनी सत्रह वर्षो की कठोर तपस्या के उपरांत इस वैदिक ज्ञान को आम लोगों के लिए सुलभ बनाया. आज विहंगम योग संस्थान के कई प्रकल्प चल रहे हैं..इन प्रकल्पों के माध्यम से जनकल्याण का कार्य संपादित हो रहा है.alt="" width="600" height="350" />
विहंगम योग से तनाव और रोग दूर भागेंगे
नासा के पूर्व वैज्ञानिक व आईआईटी के प्रोफेसर डॉ हेमंत कुमार ने कहा कि ब्रह्मविधा विहंगम के माध्यम से जीवन मे परिवर्तन आती है. उन्होंने कहा आज की भागमभाग जिंदगी में मानव शांति खो बैठा है, तो उसे योग से जुड़ना चाहिए. इससे न केवल उनका तनाव दूर होगा, बल्कि रोग भी दूर भागेंगे. जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. इससे लोग तनावग्रस्त हो जाते हैं. योग ही एक ऐसी विधा है जिससे तनाव दूर होगा. डॉ हेमंत ने कहा कि विहंगम योग की शक्ति अपार है. यह आत्मा के साथ मन की शांति मिलती है. इसे भी पढ़ें-रांची">https://lagatar.in/ias-rajesh-prasad-of-assam-meghalaya-cadre-living-in-ranchi-died-rajesh-thakur-expressed-grief/">रांचीके रहने वाले असम-मेघालय कैडर के IAS राजेश प्रसाद का निधन, राजेश ठाकुर ने जताया शोक

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