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रांची : हजार करोड़ के कार्यादेश के बावजूद एचईसी विपन्न क्यों

एचईसी : आंदोलनकारी मजदूरों ने प्रबंधन की काम पर वापसी की अपील का दिया जवाब

Ranchi : एचईसी बचाओ मजदूर जन संघर्ष समिति ने औद्योगिक शांति की अपील करनेवालों से सवाल किया है कि हजार करोड़ के कार्यादेश के बावजूद एचईसी विपन्न क्यों है. एचईसी प्रबंधन के नाम पर आंदोलनकारी मजदूरों से काम पर वापस लौटने की अपील की गयी है, जो वायरल हो चुकी है. वह अपील प्रबंधन की है भी कि नहीं, इसमें संदेह है, क्योंकि वह बिना किसी लेटर हेड और मुहर तथा सिग्नेचर के जारी की गयी है. समिति ने उक्त अपील का जवाब देते हुए कहा है कि एचईसी में कार्यरत मजदूर, कर्मचारी, ऑफिसर एचईसी की परिस्थिति से भली भांति परिचित हैं, बल्कि यह कहना ज्यादा उचित होगा कि विशेष कर पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार और प्रबंधन की उदासीनता के धीमे जहर से देश का मातृ उद्योग एचईसी आज मरणासन्न स्थिति में है और उसके मजदूर, कर्मचारी, ऑफिसर पिछले 20 माह से वेतन न मिलने के कारण भुखमरी में जी रहे हैं. फीस न चुकाने के कारण उनके बच्चों के नाम स्कूलों से कट रहे हैं, बाजार में सन्नाटा है, क्वार्टर खंडहर में तब्दील हो रहा है. समिति का कहना है कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना दिखाने वाली मोदी सरकार देश के औद्योगीकरण मैप पर चुप है. क्या बड़े उद्योगों के जाल के बिना भारत विकसित देश बन सकता है? क्या बड़े उद्योग के बिना एचईसी जैसे मातृ उद्योग की मदद के बन सकते हैं? कतई नहीं. अगर बने तो इससे निजी उद्योग भारी मुनाफा वसूलेंगे और विदेशी कंपनियां मालामाल होंगी. इसकी भरपाई आम जनता से करों की वसूली कर की जाएगी. पिछले पांच वर्षों से ज्यादा समय से एचईसी में स्थायी सीएमडी की नियुक्ति नहीं की गई है. डेपुटेशन पर निदेशक हैं. प्लांट के आधुनिकीकरण पर चुप्पी है. कार्यशील पूंजी के लिए उपलब्ध बैंक गारंटी वापिस ले ली गई है. हजार करोड़ के कार्यादेश के बावजूद उत्पादन ठप है. कैंटीन आदि सुविधाएं बंद हैं, मजदूर चंदे से अपनी कैंटीन चला रहे हैं. केंद्र सरकार और राज्य सरकार एचईसी की जमीन पर गिद्ध नजर लगाये हुए है. केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी और सीआरपीएफ, सीआईएसएफ आदि के नाम पर जमीन लूट रही है तो राज्य सरकार प्रोजेक्ट बिल्डिंग, विधानसभा, हाईकोर्ट, स्टेडियम आदि के नाम पर. एचईसी क्वार्टरों में दो दुनिया है.एक खंडहर में तब्दील होते क्वार्टर और दूसरा महलनुमा विधायक, सांसदों, मंत्रियों के क्वार्टर. एचईसी की जमीन पर बने बड़े निजी स्कूल ही एचईसी कर्मियों के बच्चों का नाम काट रहे हैं. ऐसे में एचईसी प्रबंधन की औद्योगिक शांति की अपील के पीछे आखिर मंशा क्या है?

राहुल गांधी की आम सभा की तैयारी को लेकर बैठक

शुक्रवार को हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन की बैठक यूनियन परिसर में हुई, जिसमें राहुल गांधी के 5 फरवरी को शहीद मैदान में होने वाली आम सभा के बारे में विस्तार से चर्चा हुई. बैठक को संबोधित करते हुए लीलाधर सिंह ने कहा कि, इंटक के सदस्य होने के नाते हम लोगों की जिम्मेदारी ज्यादा है. नेहरू जी ने एचईसी को बनाया था, उन्हीं के प्रपौत्र राहुल गांधी बचायेंगे. अगर एचईसी को कोई बचा सकता है तो वह राहुल गांधी और कांग्रेस है. मोदी जी सार्वजनिक उपक्रम को बंद करने या बेचने वाले हैं और भाजपा सांसद, मंत्री की हिम्मत नहीं कि मोदी जी से कोई अनुरोध करें. एचईसी को बचाने का हम लोगों के पास 5 फरवरी आखिरी मौका है. बैठक में कर्ण सिंह राठौड़, गिरीश कुमार चौहान, भोला साव, दिलीप, सुनील मांझी, जगन्नाथ राम, मुन्तकीम अंसारी, एसके पांडेय, राम जी उपाध्याय समेत कई लोग मौजूद थे. इसे भी पढ़ें : हेमंत">https://lagatar.in/hemant-sorens-tenure-was-excellent-champai-soren/">हेमंत

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