सरकारों ने कागज पर बनायी योजना, मेरी सरकार ने धरातल पर उतारी : हेमंत सोरेन
मार्च में शून्य से 20 डिग्री नीचे रहता है तापमान
गौरतलब हो कि एवरेस्ट बेस कैंप की ऊंचाई समुंद्री तल से 17598 फीट (5364 मी) है और उस ऊंचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा 50 फीसदी होती है. मार्च के महीने में वहां का तापमान लगभग शून्य से 20 डिग्री नीचे होता है. अंजनी और आनंद ने इस ट्रेक की तैयारी 4 महीने से कर रही थी. दोनों ने इस ट्रेक की शुरुआत 6 मार्च को लुक्ला नामक स्थान से की थी जो कि नेपाल में स्थित है. गौरतलब है कि लुक्ला एयरपोर्ट को दुनिया के सबसे खतरनाक एयरपोर्ट में माना जाता है. दोनों ने इस ट्रेक की शुरुआत लुक्ला से की और 7 किलोमटर तय करने के बाद दोनों अगले दिन फकडिंग पहुंचे, फकडिंग की ऊंचाई 2610 मी है. यहाँ रात गुजारने के बाद दूसरे दिन 7 मार्च को नामचे बाजार के लिए निकल पड़े. नामचे बाजार 3440 मी पर स्थित है, जिसकी दूरी फकड़िंग से 10 किलोमीटर है.दक्षिणी बेस कैंप पर पहुंचने के लिए कठिन मेहनत
अगले दिन दोनो देबुचे के लिए निकल पड़े, जिसकी ऊंचाई 3860 मी है और नामचे से 9 किलोमीटर दूर है और वहां खुखू छेत्र का सबसे विशाल बौद्ध मठ स्थित है. उसके अगले दिन 11 किलोमीटर की दूरी तय करके दोनो डिंगबोचे पहुंचे, जिसके ऊंचाई 4360 मी है. अब तक ऑक्सीजन का स्तर 75 फीसदी हो चुका था. अगले दिन 18 किलोमीटर की दूरी तय करके दोनों लोबुचे पहुंचे जो कि 4940 मी की ऊंचाई पर है. अगले दिन लोबूचे से गोरक्षेप होते हुए दोनो एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचे और वहां भारत का झंडा लहराया. इस तरह से 80 किलोमीटर की दूरी एवं 2900 मी की ऊंचाई की पैदल यात्रा तय करके 5364 मीटर की ऊंचाई पर माउंट एवरेस्ट के दक्षिणी बेस कैंप पर भारत का झंडा फहराया. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-army-jawan-murder-case-revealed-wife-had-hatched-the-conspiracy/">चाईबासा: सेना के जवान हत्याकांड का खुलासा, पत्नी ने ही रची थी साजिश

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