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आखिर रांची और कांके के तापमान में इतना अंतर क्यों होता है ?
इस बाबत जब मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि IMD (इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट) के अनुसार शहर में जहां कहीं भी ऑब्जरवेट्री या थर्मोमीटर हैं, वहां पर आपका एक्सपोजर कंडीशन कैसा है. मौसम वैज्ञानिक ने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसा कि कहीं पर खेत खलियान है, या कहीं आसपास पानी का स्त्रोत है, तो उस जगह पर टेंपरेचर डाउन देखने को मिल सकता है. अगर वही चीज सिटी में यानी कि रांची के किसी और एरिया (जैसे हरमू, डोरंडा या फिर रातू) में तापमान नापेंगे तो वहां का टेंपरेचर अलग मिलेगा.0 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर ग्राउंड लेवल पर फ्रॉस्ट देखने को मिलता है
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि रांची के कांके या बीएयू में अक्सर ठंड के मौसम में टेंपरेचर डाउन जाता है, पर लोगों को नुकसान नहीं होता. सुबह से समय में टेंपरेचर बिल्कुल नॉर्मल होता है. शाम होते ही उसमे बदलाव आता है. उन्होंने बताया कि तापमान में कमी के कारण इस एरिया में फ्रॉस्ट देखने को मिलते हैं. यहां स्नो फॉल वाली चीज इसलिए नहीं होती क्योंकि कांके या बीएयू का एरिया ग्राउंड फॉल में आता है. ऐसे में यह फ्रॉस्ट देखने को मिलते है. इसे भी पढ़ें– …">https://lagatar.in/and-sometimes-the-traffic-police-themselves-become-cranes/">…और ट्रॉफिक पुलिस कभी-कभी खुद बन जाती है क्रेन

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