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सोमवार रात रांची के कांके का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस पर लुढ़का, क्या है इसका वैज्ञानिक कारण

Shruti Singh Ranchi : झारखंड में ठंड का सितम जारी हैं. राजधानी रांची समेत पास के जिलों में सुबह कोहरे के बाद ही धूप निकल रही है. मौसम विभाग के अनुसार 17 जनवरी तक राजधानी रांची का मौसम ऐसा ही रहेगा. लेकिन रांची के तापमान और इससे सटे कांके के तापमान में अंतर रहता है. कांके और बीएयू एरिया में सोमवार की रात में न्यूनतम तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस पर लुढ़क गया. वहीं राजधानी रांची की बात करें तो सोमवार को रांची का अधिकतम तापमान 23.4°c था जबकि न्यूनतम तापमान 9.8°c रिकॉर्ड किया गया. इसे भी पढ़ें– रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-8-criminals-of-bike-thief-gang-arrested-13-motorcycles-and-scooties-recovered/">रामगढ़

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आखिर रांची और कांके के तापमान में इतना अंतर क्यों होता है ?

इस बाबत जब मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि IMD (इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट) के अनुसार शहर में जहां कहीं भी ऑब्जरवेट्री या थर्मोमीटर हैं, वहां पर आपका एक्सपोजर कंडीशन कैसा है. मौसम वैज्ञानिक ने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसा कि कहीं पर खेत खलियान है, या कहीं आसपास पानी का स्त्रोत है, तो उस जगह पर टेंपरेचर डाउन देखने को मिल सकता है. अगर वही चीज सिटी में यानी कि रांची के किसी और एरिया (जैसे हरमू, डोरंडा या फिर रातू) में तापमान नापेंगे तो वहां का टेंपरेचर अलग मिलेगा.

0 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर ग्राउंड लेवल पर फ्रॉस्ट देखने को मिलता है

मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि रांची के कांके या बीएयू में अक्सर ठंड के मौसम में टेंपरेचर डाउन जाता है, पर लोगों को नुकसान नहीं होता. सुबह से समय में टेंपरेचर बिल्कुल नॉर्मल होता है. शाम होते ही उसमे बदलाव आता है. उन्होंने बताया कि तापमान में कमी के कारण इस एरिया में फ्रॉस्ट देखने को मिलते हैं. यहां स्नो फॉल वाली चीज इसलिए नहीं होती क्योंकि कांके या बीएयू का एरिया ग्राउंड फॉल में आता है. ऐसे में यह फ्रॉस्ट देखने को मिलते है. इसे भी पढ़ें– …">https://lagatar.in/and-sometimes-the-traffic-police-themselves-become-cranes/">…

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क्या होता है फ्रॉस्ट ?

फ्रॉस्ट एक ठोस सतह पर बर्फ की एक पतली परत होता हैं. यह ऊपर के ठंडे वातावरण में जलवाष्प (गैस) से बनता है, जो एक ठोस सतह के संपर्क में आता है. इसके परिणामस्वरूप पानी से एक चरण परिवर्तन होता है. यह वाष्प (एक गैस) से बर्फ (एक ठोस) तक बन जाता है. यह आमतौर पर जमीन के पास सतहों पर नाजुक सफेद क्रिस्टल के रूप में दिखाई देता है. [wpse_comments_template]

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