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RBI ने आम आदमी पर डाला महंगाई का बोझ, होम लोन से लेकर कार लोन तक महंगा

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New Delhi : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट बढ़ा कर आम लोगों पर महंगाई बोझ डाल दिया है. रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों की जेब पर चोट तय है. पहले से महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के बजट में अब बढ़ी ईएमआई सेंध लगाने जा रही है. सेंट्रल बैंक के इस फैसले के बाद होम लोन और कार लोन समेत सभी प्रकार के कर्जों पर ब्याज की दरें बढ़ जाएंगी, जिसके कारण ईएमआई की रकम बड़ी हो जाएगी. ऑटो और पर्सनल लोन भी महंगे हो जायेंगे.

रेपो रेट एक झटके में 0.40 फीसदी बढ़कर 4.40 फीसदी

रिजर्व बैंक ने लंबे अंतराल के बाद बुधवार को अचानक रेपो रेट बढ़ाने  का ऐलान कर दिया. अब रेपो रेट एक झटके में 0.40 फीसदी बढ़कर 4.40 फीसदी हो गया है. इसके साथ ही सस्ते लोन का दौर अब समाप्त हो गया है. रिजर्व बैंक के इस ऐलान से लोगों के ऊपर ईएमआई का बोझ बढ़ना तय हो गया है.

इन फैक्टर्स से बेकाबू हुई महंगाई

आरबीआई गवर्नर शशिकांत दास ने एमपीसी की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मार्च 2022 में खुदरा महंगाई तेजी से बढ़ी और 7 फीसदी पर पहुंच गई. खासकर खाने-पीने की चीजों की महंगाई के कारण हेडलाइन सीपीआई इंफ्लेशन यानी खुदरा महंगाई तेजी से बढ़ी है. इसके अलावा जिओपॉलिटिकल टेंशन ने भी महंगाई को बढ़ाया है. रूस और यूक्रेन के बीच महीनों से जारी जंग के कारण गेहूं समेत कई अनाजों के दाम बढ़ गए हैं. इस तनाव से ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी बुरा असर पड़ा है. इसे भी पढ़ें –पंचायत">https://lagatar.in/courts-order-on-obc-reservation-in-panchayat-elections-is-paramount-chandraprakash-choudhary/">पंचायत

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सुस्त पड़ने लगी है इकोनॉमिक रिकवरी

रिजर्व बैंक की एमपीसी ने रेपो रेट के साथ ही कैश रिजर्व रेशियो  को भी 0.50 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया. गवर्नर दास ने बताया कि ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला मध्यम अवधि में इकोनॉमिक ग्रोथ के प्रोस्पेक्ट को मजबूत बनाने के लिए लिया गया है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमिक रिकवरी अब मोमेंटम खोने लगा है. रिजर्व बैंक एमपीसी ने रेपो रेट बढ़ाने के अलावा एकमोडेटिव मॉनीटरी पॉलिसी स्टान्स बरकरार रखने का भी फैसला किया.

नहीं मिलेगी महंगाई से राहत, RBI को ये डर

चालू वित्त वर्ष में महंगाई का प्रेशर बने रहने की आशंका है. RBI के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में महंगाई दर 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है. शक्तिकांत दास ने पिछले महीने बताया था कि महंगाई की दर पहली तिमाही में 6.3%, दूसरी तिमाही में 5%, तीसरी तिमाही में 5.4% और चौथी तिमाही में 5.1% रह सकती है. आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, आरबीआई और एमपीसी भारतीय अर्थव्यवस्था को मौजूदा भू-राजनीतिक संकट से निपटने में मदद कर रहे हैं। मार्च 2022 में मुद्रास्फीति में 7% की तेजी खाद्य मुद्रास्फीति से प्रेरित थी. इसके अलावा मार्च के महीने में 12 में से 9 खाद्य उपसमूहों में मुद्रास्फीति में वृद्धि दर्ज की. इसे भी पढ़ें – FSL">https://lagatar.in/hcs-double-bench-refuses-to-stay-fsl-assistant-director-appointment-process-lpa-dismissed/">FSL

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