आरसीपी व नीतीश कुमार दोनों कुर्मी जाति से आते हैं
बता दें कि आरसीपी सिंह ने पिछले महीने ही 31 अक्टूबर को अपनी नई पार्टी आसा की घोषणा की थी. जल्द ही पार्टी अपनी अगली रणनीति बनाने में जुट गई. अगले साल प्रदेश में होनेवाले विधानसभा चुनाव के करीब एक साल पहले सिंह ने अपनी नई पार्टी का गठन किया. आसा का गठन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण हो सकता है. वह इसलिए कि आरसीपी सिंह कुर्मी जाति से आते हैं. नीतीश कुमार भी कुर्मी जाति से आते हैं. ऐसे में जिस कुर्मी जाति के वोटों पर अपनी मजबूत पकड़ का दावा नीतीश करते हैं उसमें अगर सेंधमारी करने में सिंह सफल हो जाते हैं तो इसका सीधा नुकसान नीतीश और जदयू को होगा.बिहार में कुर्मी जाति की आबादी 2.87 फीसदी है
देखा जाय तो बिहार में कुर्मी जाति की आबादी 2.87 फीसदी है. खासकर नीतीश और आरसीपी दोनों के नालंदा से आने के कारण यहां के कुर्मी मतदाताओं पर इन दोनों के पकड़ मानी जाती है. कुछ अन्य कुर्मी बहुल इलाकों पर में भी आरसीपी ने पिछले कुछ समय के दौरान लगातार अपनी सक्रियता बढाई है. ऐसे में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर कुछ कुर्मी बहुल विधानसभा क्षेत्रों में आरसीपी के उम्मीदवार वोटों को काटने में सफल रहते हैं तो इसका सीधा नुकसान जदयू को हो सकता है. इसे भी पढ़ें - मुस्लिम">https://lagatar.in/muslim-personal-law-board-threatened-nitish-and-chandrababu-be-prepared-to-suffer-the-consequences-if-you-do-not-oppose-the-waqf-amendment-bill/">मुस्लिमपर्सनल लॉ बोर्ड ने नीतीश और चंद्रबाबू को धमकाया… वक्फ संशोधन बिल का विरोध नहीं किया तो खामियाजा भुगतने को तैयार रहें [wpse_comments_template]
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