Lagatar Desk
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का चुनाव आयोग के फैसलों पर मनमर्जी के खुलासे के बाद वह विपक्ष के निशाने पर हैं. विपक्षी दलों के तमाम बड़े नेताओं ने उन पर बयान जारी किये हैं. बयानों में उनसे इस्तीफे की मांग की गई है. साथ ही मोदी सरकार पर चुनाव आयोग की मदद से वोट चोरी के आरोप लगाये गए हैं.
पढ़िये, बड़े नेताओं ने क्या कहा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल ‘गांधीः वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है. इसे अंजाम देने वाले BJP, RSS और EC ने देशद्रोह का काम किया है. इंसाफ जरूर होगा.
अखिलेश यादवः सरकार का हर व्यवस्था को बुलडोज करने का इरादा है. चाहे वो कानून हो, संविधान हो, नियम हो. कोई हक और सम्मान की भी बात हो तो इनको कोई मतलब नहीं रह गया है.
शिव सेना (उद्धव) के उद्धव ठाकरेः पहले तो सिर्फ हम ही ये मुद्दे उठा रहे थे, मतलब, हम विपक्ष में हैं, लेकिन शायद देश के इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग में तीन आयुक्त हैं और दोनों आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने मंत्रिमंडल सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की है कि चुनाव आयोग में मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं. यह बहुत गंभीर मामला है और लोकतंत्र की हत्या हो रही है. जिस तरह गिरोह पार्टियां तोड़ते हैं, पार्टियां चुराते हैं और लोकतंत्र को नष्ट करते हैं, उसी तरह इन दोनों आयुक्तों ने इस कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है. इसलिए मैं दोनों को साहस दिखाने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. अब हमारी मांग है कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत जेल भेजा जाए और लोकतंत्र को बचाया जाए.
सीपीआई (एम) महासचिव एमए बेबीः मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अवैध तरीके से काम कर रहे हैं. चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं. हर फैसला सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए. वह दो सदस्यों के बहुमत की राय को नजरअंदाज कर रहे हैं और अपनी राय थोप रहे हैं. इसलिए, उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. उन्हें इस्तीफा देना चाहिए. अगर वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सरकार को उन्हें हटा देना चाहिए.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगेः राहुल गांधी ने जिस वोट चोरी और SIR का लगातार देश के सामने पर्दाफाश किया, आज वो सवाल सही साबित हो रहे है. ये लोकतंत्र से खिलवाड़ है. 24 अप्रैल 2026 को 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए Secretary General को नया Notice of Motion सौंपा था. संसद का Monsoon Session अभी तक prorogue नहीं हुआ है. क्या माननीय राज्यसभा सभापति अब उस लंबित नोटिस पर निर्णय लेंगे? आज सवाल केवल वोट चोरी का ही नहीं है. सवाल भारत के लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं पर सरकार द्वारा क़ब्ज़ा करने का है. उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता का है. चुनाव आयोग के भीतर से सामने आए ये दस्तावेज मोदी सरकार और भाजपा-आरएसएस की भूमिका पर अत्यंत गंभीर सवाल खड़े करते हैं. देश को प्रधानमंत्री मोदी से जवाब देना होगा. भारत के लोगों से लोकतंत्र छीनने का षड़यंत्र करने वालों को मुँह तोड़ जवाब दिया जाएगा.
आप के अध्यक्ष अरविंद केजरीवालः कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता है. दिल्ली, हरियाणा के चुनाव कैंसिल किए जाएं. ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और देशद्रोह का मुकदमा हो.
आप नेता संजय सिंहः स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) एक धोखाधड़ी वाली प्रक्रिया है जिसे BJP के कहने पर ज्ञानेश कुमार चला रहे हैं. अब यह बात सच साबित हो गई है. ज्ञानेश कुमार ने जान-बूझकर वोट हटाने का अपराध किया है. उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेजा जाना चाहिए. जहां-जहां भी ये धोखाधड़ी हुई है, उन सभी चुनावों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए.
राजद अंध्यक्ष तेजस्वी यादवः मैंने पूर्व में भी कहा और निरंतर कह रहा हूँ हमें तंत्र और यंत्र से चुनाव हराया गया. हम हारे नहीं हराया गया. बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और बंगाल इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं. पूरी चुनाव प्रक्रिया अब 𝐄𝐲𝐞 𝐰𝐚𝐬𝐡 बनकर रह गयी है. अभी तो ऐसे खुलासों की शुरुआत हुई है. समय आने पर जो भी इन अनैतिक गैर-संवैधानिक कुकृत्यों में सम्मिलित रहे है वो ही इनकी पोल खोलेंगे. हमने भी बहुत कुछ संभाल कर रखा है, इंतज़ार करते रहिए!
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जीः CEC को तुरंत हटाया जाना चाहिए और कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दिया जाना चाहिए. कथित तौर पर किसी एक राजनीतिक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना हमारे लोकतंत्र की नींव पर ही चोट करता है. इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद, INDIA गठबंधन की सभी विपक्षी पार्टियों ने CJI और SC जजों को पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं जाहिर की थीं. हालाँकि, उन आरोपों की न तो ठीक से जांच हुई और न ही उन पर जरूरी गौर किया गया. जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डालने वाले गंभीर सवाल बार-बार उठाए जाते हैं और फिर भी उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता, तो इससे संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है. सुप्रीम कोर्ट इससे मुँह नहीं मोड़ सकता है. फैसला लेने की अंतिम जिम्मेदारी उसी की है.