- चाणक्य आईएएस एकेडमी सभागार में प्रेस वार्ता, लाल इमरान जाहिद मौजूद थे
मोटिवेशनल कहानी पर आधारित है फिल्म
चाणक्य आईएएस एकेडमी के चेयरमैन व सक्सेस गुरु एके मिश्रा की प्रस्तुतिकरण फिल्म "अब दिल्ली दूर नहीं" एक इमोशनल-ड्रामा फिल्म है, जो एक मोटिवेशनल कहानी पर आधारित है. इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग दिल्ली के मुखर्जी नगर, दिल्ली विश्वविद्यालय, चाणक्य आईएएस एकेडमी के दिल्ली की सभी शाखाओं में, कमलानगर, राजेंद्रनगर, कनॉट प्लेस, तिहाड़ जेल और गोविंदपुरी पुलिस स्टेशन जैसी जगहों पर की गई है.रिक्शा चालक के बेटे की कहानी से प्रेरित है
फिल्म के कुछ हिस्सों को नोएडा में भी फिल्माया गया है. इस फिल्म का निर्माण शाइनिंग सन स्टूडियो के विनय भारद्वाज और संजय मवार ने किया है. फिल्म की कहानी दिनेश गौतम ने लिखी है और निर्देशन कमल चंद्रा ने किया है. दरअसल फिल्म "अब दिल्ली दूर नहीं" एक रिक्शा चालक के बेटे की कहानी से प्रेरित है, जिसका नाम गोविंद जायसवाल है. इनका चयन सिविल सेवा परीक्षा 2007 में बतौर आईएएस के रूप में हो चुका है. उस वक्त देश भर में इसकी काफी चर्चा हुई थी. फिल्म का नॉलेज पार्टनर देश का प्रसिद्ध संस्थान चाणक्य आईएएस एकेडमी है. प्रेस वार्ता के दौरान फिल्म के अभिनेता इमरान जाहिद ने उन्होंने बताया कि दरअसल यह फिल्म चाणक्य आईएएस एकेडमी के चेयरमैन व सक्सेस गुरु एके मिश्रा की अपने 30 वर्षों के संघर्षों की अवधारणा पर आधारित है, जो युवाओं को प्रेरित करने के साथ -साथ काफी प्रभावित करेगी. जाहिद ने बताया कि इस फिल्म के जरिए सक्सेस गुरु के लंबे अनुभव को भी साझा किया गया है, जो फिल्म को और भी खास बना देता है.alt="" width="1280" height="851" />
युवाओं के लिए प्रेरणादायी हो सकती है- एके मिश्रा
वहीं चाणक्य आईएएस एकेडमी के चेयरमैन व सक्सेस गुरु एके मिश्रा ने बताया कि 30 वर्षों के संघर्षों के उतार- चढ़ाव के बाद सफलता की लंबी लकीर वाकई युवाओं के लिए प्रेरणादायी हो सकती है. लेकिन यह भी सच है कि जब फिल्म रिलीज होगी और इसे आप देखेंगे तो "अब दिल्ली दूर नहीं" हर एक मेहनतकश परिवार के विद्यार्थी की कहानी महसूस होगी. दरअसल यह फिल्म ऐसे तमाम युवाओं की कहानी को जोड़ पाएगा, जो एक छोटे से इलाके से जाकर दिल्ली जैसे महानगर में संघर्ष करता है और अपनी मंजिल हासिल करता है. सक्सेस गुरु ने बताया कि यह फिल्म साबित करता है कि हमारी नियति तय करने की क्षमता सितारों में नहीं, बल्कि खुद में होती है. इसलिए इस फिल्म को लेकर यह कहा जा सकता है कि यह फिल्म मेहनतकश युवाओं के संघर्ष से लेकर सफलता हासिल करने तक की कहानी है. इसे भी पढ़ें – अफसरशाही">https://lagatar.in/bureaucracy-people-keep-visiting-government-offices-officials-absent/">अफसरशाही: लोग सरकारी दफ्तरों के काटते रहे चक्कर, अधिकारी नदारद [wpse_comments_template]
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