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पैनम कोल माइंस से 118 करोड़ वसूली के लिए कुर्की जब्ती वारंट जारी करने में देर की वजह झूठी

हाईकोर्ट मैं पैनम कोल माइंस से 600 करोड़ रुपये की वसूली की मांग को लेकर 2015 में एक जनहित याचिका दायर किया गया था. बाद में सरकार ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि पैनम से 118 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है. इस याचिका का निपटारा अब तक नहीं हुआ है.
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Ranchi: राज्य सरकार ने पैनम कोल माइंस के खिलाफ कुर्की जब्ती वारंट जारी करने में हुई डेढ़ साल की देर की वजह सर्टिफिकेट अफसर का पद खाली रहना बताया था. लेकिन हाइकोर्ट ने यह पाया कि दोनों ही अवसरों किये गये सर्टिफिकेट ऑफिसर के हस्ताक्षर एक ही जैसे हैं. हाईकोर्ट में झूठ पकड़े जाने के बाद सरकार को अब इस मुद्दे पर जवाब देना है.
 
हाईकोर्ट मैं पैनम कोल माइंस से 600 करोड़ रुपये की वसूली की मांग को लेकर 2015 में एक जनहित याचिका दायर किया गया था. बाद में सरकार ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि पैनम से 118 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है. इस याचिका का निपटारा अब तक नहीं हुआ है.
 
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से शपथ पत्र दायर कर पैनम कोल माइंस के खिलाफ दायर सर्टिफिकेट केस में सुस्ती बरते का कारण पूछा था. साथ ही सर्टिफिकेट ऑफिसर द्वारा पारित किये गये आदेश की प्रति मांगी थी. न्यायालय के इस आदेश के आलोक में राज्य सरकार की ओर से मार्च 2025 में पूरक शपथ पत्र दायर किया गया था. साथ ही सर्टिफिकेट ऑफिसर द्वारा दिये गये आदेशों की प्रति की सौंपी.
 

पैनम के खिलाफ जारी कुर्की जब्ती वारंट

 
सर्टिफिकेट केस नंबर राशि
02/10-11 6.49 करोड़
01/10-11 23.18 करोड़
32/11-12 9.96 करोड़
06/14-15
14.66 करोड़
04/15-16 38.91 करोड़
01/16-17 24.71 करोड़
 
 
हाइकोर्ट ने सर्टिफिकेट ऑफिसर द्वारा दिये गये आदेश की समीक्षा की. इसमें पाया कि सर्टिफिकेट ऑफिसर ने 1-6-2023 को बकाया वसूली के लिए पैनम कोल माइंस के खिलाफ कुर्की जब्ती वारंट जारी करने का आदेश दिया. साथ ही 31-12-2023 को इस मामले को फिर से पेश करने का निर्देश दिया. लेकिन यह माला 31-12-2023 को पेश नहीं किया गया.
 
इस मामले को 10 फरवरी 2025 को पेश किया गया और पैनम कोल माइंस के खिलाफ कुर्की जब्ती वारंट जारी किया गया. सरकार की ओर से इस देर की वजह इस अवधि में अफसर का पदस्थापित नहीं होना बताया गया. लेकिन कोर्ट ने दस्तावेज की समीक्षा के दौरान यह पाया कि आदेश पर 1-6-2023 और 10-2-2025 को फाइल पर किया गया हस्ताक्षर एक ही अधिकारी का है. इसलिए हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है.

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