कर्मचारियों की मांगें
1. कालावधि प्रोन्नति का लाभ देते हुए एसीपी और एमएसीपी के वेतनमान में वेतन-निर्धारण कर वेतन भुगतान जल्द से जल्द किया जाए. 2. 25.02.1987 को राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के गैर शैक्षणिक कर्मियों को राज्य सरकार के कर्मियों के समान सारी सुविधाएं दी गयी हैं. जिसे उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है इसका पालन सुनिश्चित किया जाये. इसलिए वो सारी सुविधाएं विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के गैर शैक्षणिक कर्मियों को दी जायें. 3. तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मियों के त्रुटिपूर्ण वेतनमान में आवश्यक संशाेधन किया जाये और बकाये वेतन का भुगतान जल्द किया जाये. 4. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वीकृत स्टाफिंग पैटर्न के आधार पर सभी पदों पर वरीयतानुसार अविलंब प्रोन्नति दी जाये और रिक्त पदों पर बहाली की जाये. 5. सप्तम पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ सरकार कर्मियों की भांति राज्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी दिया जाये. 6. संविदा आधारित नियुक्त कर्मियों को प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी और दूसरे वर्ष में 20 प्रतिशत की बढोतरी राज्य सरकार के कर्मियों की भांति की जाये. 7. विश्वविद्यालय कर्मियों को स्वास्थ्य संबंधी पांच लाख तक की सुविधा मुहैया कराया जाये. 8. विश्वविद्यालय स्तर पर डाक्टरों की एक टीम गठित कर मुख्यालय में एक लघु अस्पताल की व्यवस्था की जाये. इसे भी पढ़ें - ">https://lagatar.in/nia-interrogating-naxalite-commander-pradyumnas-son-tarun-in-naxal-case-including-arms-smuggling-terror-funding/">हथियार तस्करी, टेरर फंडिंग समेत नक्सल मामले में नक्सली कमांडर प्रद्युम्न का बेटा तरुण से एनआईए कर रही पूछताछ [wpse_comments_template]

Leave a Comment