लोचनाथ रौतिया ने जिला प्रशासन को आवेदन देकर उससे फर्जी तरीके से कई सेल डीड पर हस्ताक्षर करवा कर उसकी जमीन बेच देने की शिकायत की थी. जालसाजी कर सेल डीड पर हस्ताक्षर करवाने और उसकी अनुपस्थिति में ही रजिस्ट्री करवाने के मामले में संध्या देवी, संजीत कुमार, मुकेश सिंह व रंजीत महतो पर आरोप लगाया गया था. रौतिया ने इस खरीद फरोख्त के मामले में उसे पैसा नहीं दिये जाने की भी शिकायत की थी. जिला प्रशासन ने रौतिया की शिकायत पर, अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था.
समिति में चैनपुर के SDO और DCLR को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था. समिति ने जांच के दौरान सभी खरीददारों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया. जांच समिति द्वारा जारी नोटिस के आलोक में रौतिया की जमीन खरीदने वाले सभी खरीददार हाजिर हुए. पैसों के भुगतान का दावा किया. लेकिन कोई भुगतान से संबंधित किसी तरह का सूबत नहीं पेश कर सका.
जांच के दौरान खरीददार संध्या देवी ने जमीन के बदले पैसा देने का दावा किया. सबूत पेश करने के लिए समय मांगा. समिति ने समय दिया. लेकिन इसके बाद वह समिति के सामने पेश नहीं हुई. रंजीत कुमार ने जमीन के बदले नकद पैसा देने का दावा किया. भुगतान पूरा होन के बाद 24 अक्तूबर 2025 को रौतिया और उसकी पत्नी रजिस्ट्री ऑफिस पहुंची. सेल डीड में मैप नहीं लगने और सब-रजिस्ट्रार के चले जाने की वजह से रजिस्ट्री नहीं हुई.
बाद में 10 नवंबर को रौतिया और उसकी पत्नी रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचे और रजिस्ट्री हुई. रंजीत महतो ने मुकेश कुमार सिंह को डीड बनाने के लिए 70 हज़ार रुपये और रौतिया को 60 हजार रुपये देने का दावा किया. लेकिन इससे संबंधित सबूत नहीं पेश किया. मुकेश कुमार सिंह ने भी पैसा देने का दावा किया. सबूत पेश करने के लिए दो बार समय मांगा. लेकिन हाजिर नहीं हुआ.
रौतिया की शिकायत में इस का उल्लेख किया गया था कि उसे अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी के नाम पर एक एकड़ ज़मीन हस्तांतरित करवाने और इसमें होने वाले खर्च के बदले 20 डिसमिल जमीन रंजीत कुमार को देने की बात तय हुई थी. पति-पत्नी जमीन की रजिस्ट्री के लिए रंजीत के साथ 24 अक्तूबर 2025 को रजिस्ट्री कार्यालय गये थे. वहां दोनों का फोटो खींचा गया. कई सेल डीड पर हस्ताक्षर कराया गया और अंगुठे का निशान लिया गया. KYC कराया गया. लेकिन उस दिन रजिस्ट्री नहीं होने की बात कही गयी. इसके बाद उसकी अनुपस्थिति में ही 10 नवंबर 2025 को ज़मीन की रजिस्ट्री कर ली गयी.
समिति ने मामले की जांच में पाया कि जमीन की जमाबंदी सम्मिलित खाते में जोरगो रौतिया के नाम से जमाबंदी कायम है. जोरगो रौतिया के अन्य वारिस सुधु रौतिया, फिरू रौतिया, राम प्रसाद रौतिया, लोचनाथ रौतिया है. दूसरे हिस्सेदारों से अनापत्ति लिये बिना एक पक्ष द्वारा जमीन की बिक्री गलत है. लोचा रौतिया और उसकी पत्नी की अनुपस्थिति में ही 10 नवंबर 2024 को सेल डीड की रजिस्ट्री हुई. इस खरीद बिक्री में 34.79 लाख रुपये के नक़द लेनदेन की बात सामने आयी. लेकिन इससे संबंधित सबूत किसी ने नही पेश किया. इतनी बड़ी राशि का नकद लेनदेन वित्तीय नियमों के विपरीत है. इसलिए इस बिंदु की जांच आयकर विभाग से कराना चाहिए.
समिति ने अपनी रिपोर्ट में 24 अकूतबर 2025 और 10 नवंबर 2025 के दस्तावेज में किये गये हस्ताक्षर में अंतर पाया. इसलिए समिति ने यह माना कि 10 नवंबर को लोचन रौतिया और उसकी पत्नी की अनुपस्थिति में ही धोखाधड़ी कर रजिस्ट्री की गयी. रजिस्ट्री के समय बिक्री और भुगतान से संबंधित ब्योरा विक्रेता का सुनाया जाता है. लेकिन उसकी अनुपस्थिति में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरा करने में जिला निबंधक की संलिप्तता प्रतीत होता है.
कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा बाद में ई-KYC निकाला गया. इसके बाद उसे प्रधान लिपिक से सत्यापित कराया गया. यह इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रधान लिपिक की मिलीभगत को दर्शाता है. जांच समिति ने रजिस्ट्री ऑफिस के कर्मचारियों के खिलाफ अनुशानिक और विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की है. समिति ने धोखाधड़ी के इस मामले में लोचा रौतिया द्वारा खरीददार रंजीत कुमार, रंजीत महतो, संध्या देवी के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और सेल डीड रद्द करने का मुकदमा दायर करने की अनुशंसा की है.
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