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पुलवामा में घायल मजदूरों के परिजन बोले- क्या करें गांव में रोजगार नहीं मिलता, वहां आतंकी गोली मारता है

West Champaran : अपने घर और परिवार से दूर रहना किसी अच्छा लगता है. अगर यही अच्छा रोजगार मिलता तो हमारा बेटा बाहर क्यों जाता. परिवार का पेट पालने के लिए बेटा पुलवामा गया था, किसे पता था आतंकी हमारे ही बच्चे को निशाना बनाएंगे. मीडिया से यह बात कहते हुए फफक पड़ी पुलवामा में आतंकी हमले में घायल फैजान की मां मेहरून. फैजान पश्चिमी चंपारण के रामनगर थाना क्षेत्र के मंगुरहा देवराज गांव का रहने वाला है. गांव के लोगों ने बताया कि करीब 7 महीने पहले गांव के 7 युवक मजदूरी के लिए पुलवामा गए थे. शनिवार को सभी काम से वापस अपने डेरा लौट रहे थे, इसी दौरान आतंकियों ने निशाना बनाकर गोलीबारी कर दी. गोलीबारी में देवराज गांव के शेख शमशाद औऱ फैजान कादरी को गोली लगी है. फैजान की स्थिति फ़िलहाल ख़तरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन शमशाद की हालत गंभीर है. इसे भी पढ़ें : अक्टूबर">https://lagatar.in/october-is-full-of-festivals-banks-will-remain-closed-for-21-days-do-urgent-work/">अक्टूबर

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फैजान की मां ने बताया कि बेटा इंटर पास है. 6 बच्चों में सबसे बड़ा है, वह 19 साल का है. पिता की मौत के बाद परिवार चलाना मुश्किल हो गया था. यहां पर काम नहीं मिलता है, मिलता भी है तो मजदूरी बहुत कम मिलती है. गांव के बच्चों के साथ फैजान भी कमाने चला गया, वहां आतंकियों की गोली का शिकार हो गया. कभी सोंचा भी न था कि ऐसी घटना हो जाएगी. घटना के बाद से गांव से गए सभी युवकों के परिजन चिंता में हैं. वहीं घायल शमशाद जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहा है. जख्मी शमशाद के चाचा शेख मज़हर ने बताया कि यहां रोजगार नहीं मिलता है. दो भतीजा और दो बेटा के साथ कई बच्चे गांव के कमाने गए हैं. भतीजे को गोली लग गई है. अब हमसब चिंतित हैं. इसे भी पढ़ें : उत्तराखंड">https://lagatar.in/uttarakhands-ankita-bhandari-murder-case-family-not-satisfied-with-the-postmortem-report/">उत्तराखंड

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