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राहत : झारखंड में डॉक्टरों ने खत्म की हड़ताल

 
  • तीन घंटे की हड़ताल का दिखा असर, मरीजों की जान रही आफत में
  • एमजीएम के चिकित्सक से मारपीट करने वाले आरोपी गिरफ्तार
Ranchi : झारखंड में डॉक्टर्स की हड़ताल शुक्रवार को कुछ घंटे में ही खत्म हो गई. एमजीएम जमशेदपुर में डॉक्टर की पिटाई करनेवाले आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना मिलने के तुरंत बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली. इससे पहले सुबह 6 बजे से ही मेडिकल सेवाएं बंद कर दी गई थीं. केवल इमरजेंसी चल रही थी. हड़ताल खत्म करने की घोषणा के बाद रिम्स समेत राज्य के सभी अस्पतालों में फिर से ओपीडी सेवाएं शुरू कर दी गईं. आईएमए के सचिव प्रदीप सिंह ने हड़ताल वापस लेने की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी मुख्य मांग थी कि डॉक्टर के साथ मारपीट करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए. उनके गिरफ्तार होने की सूचना के बाद हमने हड़ताल वापस ले ली है. इस हड़ताल में आईएमए और झासा के राज्यभर के 15 हजार से ज्यादा सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टर शामिल थे. बता दें कि डॉक्टर्स जमशेदपुर मेडिकल कॉलेज में हुई मारपीट के बाद कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध में थे. मेडिकल प्रोटेक्शन बिल के प्रति सरकार के शिथिल रवैए से भी डॉक्टर नाराज थे. उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन जल्द से जल्द इस पर फैसला लेने का आग्रह किया है. 19 सितंबर को जमशेदपुर मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड में कार्यरत पीजी मेडिकल के छात्र डॉ कमलेश उरांव के साथ मारपीट हुई थी.

सुबह 9.30 आईएमए के सदस्य बंद कराने पहुंचे

सुबह के 9.30 बजे आईएमए के सदस्य रिम्स जेडीए के साथ मिल कर ओपीडी बंद कराने पहुंचे. सफेद कोट की शांति अब करेगी क्रांति के नारों के साथ रिम्स परिसर के एक एक ओपीडी को बंद करा रहे थे. हालांकि उससे पहले ही ओपीडी पर्ची नहीं काटी जा रही थी. चिकित्सक भी अपने ओपीडी में मौजूद नहीं थे. मेडिसिन ओपीडी में डॉ अजीत पहुंचे हुए थे पर आईएमए ने उन्हें मरीज देखने नहीं दिया. टीम में डॉ भारती कश्यप और डॉ प्रदीप शामिल थे. वहीं जेडीए के पूर्व अध्यक्ष डॉ विकास, डॉ अनितेश, और वर्तमान जेडीए के अध्यक्ष डॉ जयदीप चौधरी भी बंद करा रहे थे.

दूसरी पाली में ही सही से मिल सका परामर्श

रिम्स और सदर में ओपीडी सही तरीके से दूसरी पाली में ही संचालित हो सकी. पहली पाली में रिम्स में आई, ऑर्थो, ईएनटी सहित अन्य एक दो विभाग में ही पहली पाली में चिकित्सक मिले. वहीं दूसरी पाली में मरीजों को परामर्श सही से मिला. निजी केंद्रों में भी मरीजों को दूसरी पाली में ही परामर्श मिल सका. इसका सबसे बड़ा नुकसान बाहर से आने वाले मरीजों को हुआ. सुबह दिखाने के बाद वे शाम को जांच रिपोर्ट दिखाकर दवा ले लेते थे. शुक्रवार को डॉक्टरों ने जांच कराने ही दूसरी पाली में कहा, जिसके बाद जांच रिपोर्ट उन्हें शनिवार को मिल सकेगा. अब दवाई के लिए उन्हें दूसरे दिन आना होगा. शुरुआती तीन घंटे की हड़ताल ने ही मरीजों के इलाज का एक दिन लगभग बर्बाद कर दिया. इसे भी पढ़ें – राष्ट्रीय">https://lagatar.in/14-member-jharkhand-team-reaches-assam-for-national-lawn-ball-championship/">राष्ट्रीय

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