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लेडी सुपरवाइजर के 12 अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से राहत, छह सप्ताह में नियुक्ति का आदेश

Ranchi News: न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जारी सभी 12 कारण बताओ नोटिस को निरस्त कर दिया. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को एनसीएल/ईडब्ल्यूएस श्रेणी का अभ्यर्थी मानते हुए संबंधित आरक्षित रिक्तियों के विरुद्ध लेडी सुपरवाइजर के पद पर नियुक्त किया जाए.
 
फाइल फोटो
  • हाइकोर्ट ने 12 अभ्यर्थियों के  नोटिस किए निरस्त,
  •  आरक्षित पदों पर नियुक्ति के साथ सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने लेडी सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में 12 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भर्ती विज्ञापन और नियुक्ति नियमों में गैर क्रीमी लेयर (एनसीएल) अथवा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तिथि से पहले प्राप्त करने की अनिवार्यता निर्धारित नहीं है, तो केवल इस आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता कि उनके प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी हुए हैं.


न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जारी सभी 12 कारण बताओ नोटिस को निरस्त कर दिया. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को एनसीएल/ईडब्ल्यूएस श्रेणी का अभ्यर्थी मानते हुए संबंधित आरक्षित रिक्तियों के विरुद्ध लेडी सुपरवाइजर के पद पर नियुक्त किया जाए. अदालत ने नियुक्ति से संबंधित आवश्यक आदेश छह सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है. सभी याचिकाएं स्वीकार कर ली गईं. मामले में मुमताज बेगम एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अर्पण मिश्रा एवं अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा.

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जेएसएससी ने 444 पदों के लिए निकाला था विज्ञापन

मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की विज्ञापन संख्या 14/2023 से संबंधित है. आयोग ने लेडी सुपरवाइजर के कुल 444 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि दो अक्टूबर 2023 निर्धारित थी.


याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी. 27 मई 2025 को जारी शॉर्टलिस्ट में उनके नाम शामिल किए गए और उन्हें प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए बुलाया गया. इस दौरान अभ्यर्थियों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के एनसीएल/ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए.


जेएसएससी ने 14 अगस्त 2025 को सफल अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को लेडी सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति के लिए सफल घोषित किया गया था.

 

आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में लंबित था मामला

इस भर्ती प्रक्रिया में पात्रता और आरक्षण से संबंधित मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं. 28 अगस्त 2025 को अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए इन मामलों के निस्तारण तक लेडी सुपरवाइजर के पदों पर नियुक्ति पर रोक लगा दी थी.


बाद में 24 मार्च 2026 को खंडपीठ ने मामले में विचार करने के बाद याचिकाओं को एकल पीठ के पास वापस भेज दिया था, ताकि अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए विचार से बाहर किए जाने से जुड़े अन्य मुद्दों पर निर्णय लिया जा सके.


इसके बाद जेएसएससी ने 313 अभ्यर्थियों के नाम नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को अनुशंसित किए. अप्रैल 2026 में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने अभ्यर्थियों से दोबारा आवश्यक दस्तावेज और एनसीएल/ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र मांगे. 21 अप्रैल 2026 को इनमें से 234 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए.


हालांकि संबंधित 12 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि के बाद जारी होने के आधार पर विभाग ने 25 मई 2026 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.


विज्ञापन में प्रमाणपत्र पहले से रखने की शर्त नहीं थी

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को आधार तिथि निर्धारित किया गया था, लेकिन एनसीएल/ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र भी उसी तिथि से पहले प्राप्त करने की कोई स्पष्ट शर्त नहीं थी.


वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए संबंधित प्रमाणपत्र निर्धारित कटऑफ तिथि तक अभ्यर्थियों के पास होना चाहिए. सरकार ने अपने पक्ष में विभागीय पत्र और परिपत्र के अलावा सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के पूर्व के फैसलों का भी हवाला दिया.


विभागीय पत्र के आधार पर नहीं थोपी जा सकती नई शर्त

न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती विज्ञापन वह दस्तावेज है, जिसके माध्यम से नियुक्ति करने वाली संस्था अभ्यर्थियों को पात्रता की शर्तों और आवश्यक प्रमाणपत्रों की जानकारी देती है. अभ्यर्थी उसी के आधार पर आवेदन करते हैं.


अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी अयोग्यता की शर्त, जिसका उल्लेख न तो भर्ती नियमों में है और न ही विज्ञापन में, दस्तावेज सत्यापन के चरण में लागू नहीं की जा सकती. ऐसा करना अन्यथा वैध दावे को प्रभावित करेगा.


अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 25 फरवरी 2019 के जिस विभागीय पत्र का हवाला दिया, वह आंतरिक विभागीय संचार है. ऐसे पत्र के आधार पर किसी अधिकार को प्रदान करने या उससे वंचित करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता.


इसी तरह 15 फरवरी 2019 के परिपत्र को भी अदालत ने मौजूदा मामले में लागू नहीं माना. अदालत के अनुसार, यह परिपत्र राज्य सरकार की सिविल सेवाओं और पदों पर सीधी भर्ती में ईडब्ल्यूएस आरक्षण से संबंधित है. इसके अलावा भर्ती विज्ञापन में इस परिपत्र का उल्लेख भी नहीं था.


सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पुराने फैसले अलग परिस्थितियों से जुड़े

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिव्या बनाम भारत संघ, पूनम द्विवेदी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और यूपीएससी बनाम गौरव सिंह मामलों के फैसलों के साथ झारखंड हाईकोर्ट के डॉ. नूतन इंदवार बनाम झारखंड राज्य मामले के निर्णय का भी हवाला दिया था.


हालांकि अदालत ने कहा कि इन मामलों की परिस्थितियां वर्तमान मामले से अलग थीं. संबंधित मामलों में प्रमाणपत्र की वैधता या कटऑफ तिथि को लेकर स्पष्ट प्रावधान थे, जबकि लेडी सुपरवाइजर के विज्ञापन में आवेदन की अंतिम तिथि तक एनसीएल/ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र प्राप्त करने की ऐसी कोई स्पष्ट शर्त नहीं थी.


अदालत ने कहा कि जब भर्ती विज्ञापन में प्रमाणपत्र जमा करने की अंतिम तिथि को लेकर स्पष्टता नहीं है, तो अभ्यर्थियों को केवल प्रमाणपत्र बाद में जारी होने के आधार पर आरक्षण के लाभ से वंचित करना उचित नहीं है.


छह सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश

अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जारी 25 मई 2026 के सभी संबंधित  नोटिस निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को एनसीएल/ईडब्ल्यूएस श्रेणी का अभ्यर्थी मानने का निर्देश दिया.


साथ ही राज्य सरकार को संबंधित एनसीएल/ईडब्ल्यूएस रिक्तियों के विरुद्ध उनकी नियुक्ति करने और सभी परिणामी लाभ प्रदान करने का आदेश दिया. इसके लिए आवश्यक आदेश छह सप्ताह के भीतर जारी करने को कहा गया है.

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