एलएडीसी के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय की पहल से सुलझा पति-पत्नी का विवाद)
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
इस दौरान नेशनल फोरम फॉर विकर सेक्शन ऑफ द सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कर्मचारी परिसंघ के नेता डॉ सहदेव राम, धार्मिक नेता स्वामी दिव्यज्ञान महराज, रूनाद फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक डॉ अर्पिता सूत्रधार, आईआईटीयन एवं ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान के प्रबंध निदेशक अमलेंदु सरकार और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहे. इसे भी पढ़ें : जल">https://lagatar.in/retired-dgp-known-as-jalguru-is-running-a-campaign-for-water-conservation-said-save-every-drop-of-rain/">जलसंरक्षण की मुहिम चला रहे हैं जलगुरु के नाम से मशहूर सेवानिवृत्त डीजीपी, कहा- वर्षा की हर एक बूंद को सहेजें
भारतीय संस्कृति के लिए घातक है समलैंगिक विवाह
राज्यपाल से मुलाकात के बाद धार्मिक नेता स्वामी दिव्यज्ञान महराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम भारत की संस्कृति और भारतीय पारिवारिक व्यवस्था के लिए घातक है. भारतीय पारिवारिक व्यवस्था को सर्वोत्तम माना गया है. इसी परंपरा पर चलते हुए विश्व भर में महिला-पुरुषों के विवाह को ही मान्यता दी गयी है. कहा कि कोई भी धर्म संप्रदाय, विचार के लोग पुरुष को पुरुष से और महिला को महिला से विवाह करने की अनुमति नहीं देते हैं.न्यायपालिका के फैसले से समाज होता है प्रभावित
नेशनल फोरम फॉर विकर सेक्शन ऑफ द सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कर्मचारी परिसंघ के नेता डॉ सहदेव राम ने कहा कि इस देश में न्यायपालिका को सबसे अधिक सम्मान दिया जाता है. ऐसे में उनके किसी भी फैसले से समाज प्रभावित होता है. इसलिए इस विषय में पुनर्विचार करना अति आवश्यक है. बताया कि राज्यपाल ने आश्वस्त किया है कि इस विषय पर वह गंभीर रूप से विचार करेंगे. इसे भी पढ़ें : जानिये">https://lagatar.in/know-why-nishikant-sunil-singh-biranchi-narayan-are-attending-maths-karnataka/">जानियेकर्नाटक के मठों में हाजिरी क्यों लगा रहे हैं निशिकांत, सुनील सिंह और बिरंची नारायण

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