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धार्मिक संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, समलैंगिक विवाह को लेकर नाराजगी जताई

Ranchi : समलैंगिक विवाह यानी पुरुष से पुरुष और स्त्री से स्त्री के विवाह को कानूनी मान्यता देने वाले मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इसके खिलाफ कई सामाजिक संगठनों ने आवाज उठानी भी शुरू कर दी है. झारखंड में भी समलैंगिक विवाह का विरोध हो रहा है. इसको लेकर झारखंड सिविल सोसाइटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम से एक ज्ञापन सौंपा है. जिसमें उन्होंने समलैंगिक विवाह को लेकर अपनी चिंता और नाराजगी जाहिर की है. (पढ़ें, पलामू:">https://lagatar.in/palamu-husband-wife-dispute-resolved-with-the-initiative-of-ladc-deputy-chief-santosh-kumar-pandey/">पलामू:

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प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल

इस दौरान नेशनल फोरम फॉर विकर सेक्शन ऑफ द सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कर्मचारी परिसंघ के नेता डॉ सहदेव राम, धार्मिक नेता स्वामी दिव्यज्ञान महराज, रूनाद फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक डॉ अर्पिता सूत्रधार, आईआईटीयन एवं ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान के प्रबंध निदेशक अमलेंदु सरकार और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहे. इसे भी पढ़ें : जल">https://lagatar.in/retired-dgp-known-as-jalguru-is-running-a-campaign-for-water-conservation-said-save-every-drop-of-rain/">जल

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भारतीय संस्कृति के लिए घातक है समलैंगिक विवाह

राज्यपाल से मुलाकात के बाद धार्मिक नेता स्वामी दिव्यज्ञान महराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम भारत की संस्कृति और भारतीय पारिवारिक व्यवस्था के लिए घातक है. भारतीय पारिवारिक व्यवस्था को सर्वोत्तम माना गया है. इसी परंपरा पर चलते हुए विश्व भर में महिला-पुरुषों के विवाह को ही मान्यता दी गयी है. कहा कि कोई भी धर्म संप्रदाय, विचार के लोग पुरुष को पुरुष से और महिला को महिला से विवाह करने की अनुमति नहीं देते हैं.

न्यायपालिका के फैसले से समाज होता है प्रभावित

नेशनल फोरम फॉर विकर सेक्शन ऑफ द सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कर्मचारी परिसंघ के नेता डॉ सहदेव राम ने कहा कि इस देश में न्यायपालिका को सबसे अधिक सम्मान दिया जाता है. ऐसे में उनके किसी भी फैसले से समाज प्रभावित होता है. इसलिए इस विषय में पुनर्विचार करना अति आवश्यक है. बताया कि राज्यपाल ने आश्वस्त किया है कि इस विषय पर वह गंभीर रूप से विचार करेंगे. इसे भी पढ़ें : जानिये">https://lagatar.in/know-why-nishikant-sunil-singh-biranchi-narayan-are-attending-maths-karnataka/">जानिये

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संगठनों ने समलैंगिक विवाह को भारतीय परिवार व्यवस्था पर कुठाराघात बताया

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के लिए 5 सदस्यीय संवैधानिक खंडपीठ की संरचना की है. जो अयोध्या के तर्ज पर हर दिन सुनवाई करेगी. देशभर की महिलाओं, विभिन्न सामाजिक और अन्य संगठनों ने इस निर्णय को भारतीय परिवार व्यवस्था पर कुठाराघात बताया है. साथ ही इससे होने वाली सामाजिक विकृति को लेकर भी चिंता जाहिर की है. हर राज्य के सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर इस पर पुनर्विचार करने को कहा. [wpse_comments_template]

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