सरना धर्म कोड की मांग पर सवाल खड़ा किया
बैठक में सरना धर्म कोड की मांग पर सवाल खड़ा किया गया. कहा गया कि इसकी मांग करने वालों को स्पष्ट करना चाहिए कि सरना कोड/कॉलम मिलने के बाद आदिवासी/ जनजाति समाज बहुसंख्यक कहलायेंगे या अल्पसंख्यक. अगर आदिवासी/ जनजाति समाज अल्पसंख्यक कहलाएंगे तो फिर आदिवासी/ जनजाति समाज कौन है. जनजातियों को मिलने वाला आरक्षण , सुविधा का क्या होगा. संविधान के अनुच्छेद 13 (3) (का) का क्या होगा जो आदिवासी/जनजातियों के लिए रूढ़ि और प्रथा विधि का बल प्रदान करता है. पेसा एक्ट के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में रुढ़ि जन व्यवस्था परंपरा को पालन करने वाले मांझी, मुंडा, पाहन या महतो ही ग्राम प्रधान, ग्राम सभा के अध्यक्ष बनेंगे. ऐसी स्थिति में क्या रुढ़िजन व्यवस्था बच पाएगी. सरना धर्म कोड/ कॉलम की मांग किसका है आदिवासियों का या कैथोलिक चर्च की है, यह भी स्प्ष्ट किया जाना चाहिए. बैठक में सोमा उरांव, जय मंत्री उरांव, लूथरू उराव, लोरया उराव, कुमुदिनी लकड़ा, ललित उराव, बबलू उराव, राजू उरांव, कावेरी उराव, लाल मुनी उराव, लक्ष्मण उराव, नारो उरांव, मुन्नी देवी सहित कई उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें – चंद्रप्रकाश">https://lagatar.in/chandraprakash-chaudhary-said-gimmick-will-not-work-public-will-answer-including-5-news-of-ramgarh-district/">चंद्रप्रकाशचौधरी ने कहा- नहीं चलेगी नौटंकी, जनता देगी जवाब समेत रामगढ़ जिले की 5 खबरें [wpse_comments_template]

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